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1950 में सादे समारोह में कहां मनाया गया पहला गणतंत्र दिवस, जानने के लिए पढ़िए जरूर

साल 1950 में भारत के पहले गणतंत्र दिवस को दिल्ली प्रशासन ने राहत गृहों और ग्रामीण विद्यालयों में सादे समारोहों के माध्यम से मनाया...

नई दिल्ली, कंज्यूमर खबर। साल 1950 में भारत के पहले गणतंत्र दिवस को दिल्ली प्रशासन ने राहत गृहों और ग्रामीण विद्यालयों में सादे समारोहों के माध्यम से मनाया। जानकारी के अनुसार, बच्चों को स्मृति चिह्न के रूप में प्लेट दी गईं और इन गृहों में रहने वाली महिलाओं को मिठाइयां और खिलौने प्रदान किये गए। फाइलों से पता चलता है कि समारोह काफी हद तक विकेंद्रीकृत थे और इनमें बच्चों, विस्थापित परिवारों और सरकारी संस्थानों में रहने वाली महिलाओं पर विशेष ध्यान दिया गया था, जो विभाजन के बाद के उथल-पुथल से उबर रहे शहर की प्राथमिकताओं को दर्शाते हैं। रिकॉर्ड में उल्लेख किया गया है कि दिल्ली के ग्रामीण क्षेत्रों में गणतंत्र दिवस समारोह जिला बोर्ड द्वारा आयोजित किए गए थे। इसमें कहा गया है कि स्कूली बच्चों को स्मृति चिह्न के रूप में प्लेट दी गईं, जबकि संस्थानों को इस अवसर को मनाने के लिए झंडे, खंभे और मोमबत्तियां उपलब्ध कराई गईं। इन गतिविधियों पर कुल व्यय लगभग 11,250 रुपये आंका गया था, जिसे बाद में 11,093 रुपये के रूप में दर्ज किया गया। अभिलेखीय रिकॉर्ड से पता चलता है कि व्यय की जांच की गई और तत्कालीन मुख्य आयुक्त द्वारा पंजाब जिला बोर्ड अधिनियम, 1883 के तहत औपचारिक रूप से मंजूरी दी गई।

गणतंत्र दिवस समारोह में आश्रय गृहों में रहने वाली महिलाओं को भी शामिल किया गया था। दिल्ली के तत्कालीन मुख्य आयुक्त के कार्यालय की फाइलों से पता चलता है कि प्रांतीय महिला अनुभाग ने महिला अनुभाग गृहों में समारोह आयोजित किए थे, जहां रहने वाली महिलाओं में 26 जनवरी, 1950 को फल, मिठाई और खिलौने वितरित किए गए थे।

रिकॉर्ड के अनुसार, इस उद्देश्य के लिए 750 रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी, जिसमें से लगभग 525 रुपये उस दिन खर्च किए गए, जबकि 225 रुपये की राशि शेष बची थी। इसमें कहा गया है कि मार्च 1950 के बाद के पत्राचार से पता चलता है कि शेष 225 रुपये का उपयोग उसी वर्ष बाद में महिला अनुभाग दिवस से जुड़े समारोह के आयोजन के लिए करने की अनुमति दी गई थी। फाइलों में उल्लिखित महिला अनुभाग गृह विभाजन के बाद विस्थापित महिलाओं और बच्चों के पुनर्वास के लिए दिल्ली में स्थापित छात्रावासों और राहत संस्थानों के व्यापक नेटवर्क का हिस्सा थे। पुरालेखीय सामग्री के अनुसार, प्रांतीय महिला अनुभाग का कार्यालय पी ब्लॉक, नयी दिल्ली में स्थित था। इन दस्तावेजों से यह पता चलता है कि दिल्ली का पहला गणतंत्र दिवस किसी भव्य आयोजन के बजाय औपचारिक अनुमोदन और बजटीय निगरानी द्वारा समर्थित सुनियोजित कल्याणकारी गतिविधियों के माध्यम से मनाया गया था।

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