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अब जेएनयू में नहीं दे पाएंगे भड़काऊ भाषण!, प्रशासन ने उठाए ये कदम…

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) एक बार फिर से चर्चा में है। जेएनयू कैंपस में 2020 की देश विरोधी कांड के 6वीं बरसी पर छात्रों द्वारा फिर लगाए गए आपत्तिजनक नारे। इस बार ये नारे सोमवार रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ लगाए गए हैं। जिसकी वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है...

नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) एक बार फिर से चर्चा में है। जेएनयू कैंपस में 2020 की देश विरोधी कांड के 6वीं बरसी पर छात्रों द्वारा फिर लगाए गए आपत्तिजनक नारे। इस बार ये नारे सोमवार रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ लगाए गए हैं। जिसकी वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। इस घटना को लेकर जहां एक तरफ जेएनयू प्रशासन सख्त नजर आ रहा है वहीं देश भर के नेताओं सहित भाजपा ने आपत्तिजनक नारों के खिलाफ अपनी नाराजगी व्यक्त की है। गौरतलब है कि ये घटना तब हुई जब सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में छात्र नेता उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार ये नारे साबरमती हॉस्टल इलाके में वाम समर्थित स्टूडेंट ग्रुप्स के कोर्ट के फैसले के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन के दौरान लगाए गए। बता दें कि खालिद और इमाम पांच साल से ज़्यादा समय से ज्यूडिशियल कस्टडी में हैं। खबर लिखे जाने तक पुलिस मामले की जांच में जुटी है पर किसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। हालांकि, मामला को तूल पकड़ते देख दोपहर को जेएनयू के चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर ने वसंत कुंज पुलिस स्टेशन एसएचओ को पत्र लिख एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

क्या है पूरा मामला…
दरअसल जेएनयू कैंपस में 2020 की हिंसा की छठी बरसी के नाम पर “ए नाइट ऑफ रेज़िस्टेंस विद गोरिल्ला ढाबा” कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें लगभग 30–35 छात्र मौजूद थे। बताया जाता है कि कार्यक्रम विश्वविद्यालय के छात्र संगठन की ओर से आयोजित किया गया था। जिसमें उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर आए न्यायिक फैसले के बाद कार्यक्रम का स्वर बदल गया। सुप्रीम कोर्ट की अवमानना जैसे नारे लगाने का आरोप है कि इस दौरान कुछ छात्रों द्वारा आपत्तिजनक, उकसाने वाले और भड़काऊ नारे लगाए गए। जिन्हें सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना के रूप में बताया गया है। जेएनयू सिक्योरिटी द्वारा भेजे गए पत्र में नौ छात्रों के नाम भी दिए गए हैं।

घटना के समय सुरक्षा बल वहां मौजूद थे…
प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना के समय सुरक्षा विभाग के अधिकारी और सुरक्षाकर्मी मौके पर मौजूद थे और स्थिति पर नजर रखे हुए थे। सुरक्षा विभाग ने पुलिस से भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया है। इस पत्र की प्रतिलिपि कुलपति और रजिस्ट्रार कार्यालय को भी भेजी गई है।

जेएनयू के वामपंथी-टुकड़े-टुकड़े गैंग का देशविरोधी चेहरा फिर उजागर : एबीवीपी
जेएनयू परिसर में वामपंथी गुटों द्वारा हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान एक बार फिर वही पुरानी देशविरोधी मानसिकता सामने आई, जो समय-समय पर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गरिमा को ठेस पहुंचाती रही है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राष्ट्रविरोधी तथा हिंसात्मक गतिविधियों में संलिप्त उमर ख़ालिद और शरजील इमाम की ज़मानत याचिकाएं ख़ारिज किए जाने के बाद, कुछ वामपंथी और तथाकथित ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ से जुड़े तत्वों ने न्यायिक निर्णय का सम्मान करने के बजाय खुलेआम उग्र नारेबाज़ी की। इस दौरान न केवल संवैधानिक संस्थाओं को चुनौती देने वाले नारे लगाए गए, अपितु भारत के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, आरएसएस और एबीवीपी के विरुद्ध “कब्र खोदने” जैसे उकसाने वाले नारे भी सुनने को मिले। यह कहना है एबीवीपी प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा का। उन्होंने कहा कि जेएनयू परिसर में वामपंथी गुटों द्वारा की गई नारेबाज़ी पूर्णत: देशविरोधी मानसिकता को दर्शाती है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद भी जिस प्रकार संवैधानिक पदों और राष्ट्रविरोधी भाषा का प्रयोग किया गया, वह अस्वीकार्य है। एबीवीपी जेएनयू इकाई ऐसे हर देशविरोधी कृत्य की कड़ी निंदा करती है और इसे छात्र आंदोलन नहीं, बल्कि सुनियोजित अराजकता मानती है।

दिल्ली विधानसभा में भी भाजपा नेताओं ने ‌की निंदा…
जेएनयू की घटना पर भाजपा के नेताओं ने आरोप लगाया है कि जेएनयू के अंदर की कुछ ताकतें विदेशी ताकतों के साथ मिली हुई हैं। दिल्ली विधानसभा के डिप्टी स्पीकर मोहन सिंह बिष्ट ने कहा कि इस तरह के देश विरोधी नारे लगाना सही नहीं है, खासकर शैक्षणिक संस्थानों से, जहां सरकार और पूरा देश छात्रों से उम्मीद करता है कि वे देश और देशहित के लिए काम करने के लिए तैयार होकर निकलें। मोहन सिंह बिष्ट ने कहा कि जिस तरह के नारे लगे हैं, ऐसा बर्ताव बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। वहीं भाजपा विधायक अरविंदर सिंह लवली ने जेएनयू कैंपस में लगे नारों को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से जब न्यायपालिका ने फैसला सुनाया है, तो उसने सभी तथ्यों की जांच करने और हर पहलू पर विचार करने के बाद ऐसा किया है। इस देश में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट से ऊपर कोई अथॉरिटी नहीं है। उधर दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद ने कहा कि शर्जील इमाम और उमर खालिद की जमानत खारिज होने के बाद जेएनयू परिसर में इस प्रकार के नारे लगना अत्यंत निंदनीय है। लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है, लेकिन हिंसा, उकसावे और व्यक्तिगत या वैचारिक हिंसा की राजनीति के लिए कोई स्थान नहीं हो सकता।

 

यूनिवर्सिटी को नफरत की प्रयोगशाला नहीं बनने देंगे: जेएनयू प्रशासन
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को लेकर की गई आपत्तिजनक नारेबाजी पर जेएनयू प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है और ऐसा करने वाले छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पोस्ट में जेएनयू प्रशासन की तरफ से कहा गया है कि जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाने वाले छात्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का वादा किया है। इस मामले में पहले ही एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। पोस्ट में कहा गया है कि विश्वविद्यालय इनोवेशन और नए विचारों के केंद्र होते हैं, और उन्हें नफरत की प्रयोगशालाओं में बदलने की इजाज़त नहीं दी जा सकती। बोलने और अभिव्यक्ति की आज़ादी एक मौलिक अधिकार है लेकिन किसी भी तरह की हिंसा, गैर-कानूनी व्यवहार या देश विरोधी गतिविधि को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कहा है कि इस घटना में शामिल छात्रों को भी अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा, जिसमें तुरंत सस्पेंशन, निष्कासन और यूनिवर्सिटी से स्थायी रूप से बाहर निकालना शामिल है।

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