दिल्ली

किराड़ी-मुंडका हॉल्ट-सप्लीमेंट्री ड्रेन, पश्चिमी दिल्ली को मिलेगा नया जीवन

दिल्ली में हर मॉनसून में सड़कों में जलभराव की स्थिति बनी रहती है लेकिन अब यह इतिहास होने वाला है। दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने राजधानी को जलभराव से हमेशा के लिए मुक्ति दिलाने के लिए एक बड़ी पहल की है। इसके लिए ‘ड्रेनेज मास्टर प्लान’ के तहत चार बड़े ट्रंक ड्रेनों का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर...

नई दिल्ली, कंज्यूमर खबर। दिल्ली में हर मॉनसून में सड़कों में जलभराव की स्थिति बनी रहती है लेकिन अब यह इतिहास होने वाला है। दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने राजधानी को जलभराव से हमेशा के लिए मुक्ति दिलाने के लिए एक बड़ी पहल की है। इसके लिए ‘ड्रेनेज मास्टर प्लान’ के तहत चार बड़े ट्रंक ड्रेनों का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है। ये प्रोजेक्ट्स पश्चिमी और दक्षिणी दिल्ली के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। अब तक ओवरलोडेड सीवर और पुरानी नालियों की वजह से दिल्ली डूबती थी। मगर इन नए और आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम से बारिश का पानी मिनटों में निकल जाएगा। सरकार का दावा है कि ये प्रोजेक्ट्स दिल्ली को फ्यूचर रेडी बनाएंगे। मार्च 2026 तक एक अहम हिस्सा पूरा करने का टारगेट रखा गया है। इससे लाखों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
योजना के तहत दिल्ली के चार बड़े नालों, मुंडका हॉल्ट-सप्लीमेंट्री ड्रेन, एमबी रोड स्टॉर्म वॉटर ड्रेन, किराड़ी-रिठाला ट्रंक ड्रेन और रोहतक रोड (एनएच-10) स्थित स्टॉर्म वॉटर ड्रेन को ‘ड्रेनेज मास्टर प्लान’ के तहत अहम घटक के रूप में विकसित किया जा रहा है। दिल्ली सरकार ने इन बड़े ट्रंक ड्रेनों के निर्माण और विस्तार के कार्य की गति को तेज कर दिया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 1970 के दशक में दिल्ली के सीवर सिस्टम व जलनिकासी को लेकर ‘ड्रेनेज मास्टर प्लान’ बनाया गया था। बढ़ती आबादी और तेज निर्माण गतिविधियों के बावजूद इस मास्टर प्लान में अपेक्षित बदलाव नहीं हो पाए, जिससे जल निकासी की स्थिति लगातार गंभीर होती रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने दिल्ली की भौगोलिक स्थिति, जलभराव व आबादी के दबाव को ध्यान में रखते हुए प्रभावी परिवर्तन किए हैं और उसी हिसाब से नालों आदि का निर्माण किया जा रहा है

किराड़ी, मुंडका आदि में खत्म होगा जलभराव…
पश्चिमी दिल्ली के किराड़ी, मुंडका, बवाना और नांगलोई विधानसभा क्षेत्रों की जल-निकासी समस्या के समाधान के लिए रेलवे लाइन के समानांतर 4.5 किलोमीटर लंबे ट्रंक ड्रेन का निर्माण प्रस्तावित किया गया है। इस ड्रेन का निर्माण सिंचाई व बाढ़ नियंत्रण विभाग द्वारा किया जा रहा है। इस नाले की अनुमानित लागत 220.93 करोड़ रुपये है और इसे 1,520 एकड़ के बड़े कैचमेंट एरिया से आने वाले वर्षा जल को संभालने के लिए डिजाइन किया गया है। नाले की डिस्चार्ज क्षमता 760 क्यूसेक रखी गई है, ताकि मॉनसून के दौरान चरम वर्षा की स्थिति में भी जल निकासी बिना रुके हो सके। नाले की शुरुआत मुंडका हॉल्ट स्टेशन से होगी और यह रेलवे कॉरिडोर के साथ-साथ चलते हुए सप्लीमेंट्री ड्रेन में जाकर मिलेगा।
इस ड्रेन की विशेषता यह है कि इसके मार्ग में आने वाले विभिन्न सेकेंडरी ड्रेनों का पानी भी इसमें समाहित किया जाएगा, जिससे पूरे क्षेत्र की जल-निकासी व्यवस्था एकीकृत और सुव्यवस्थित हो सकेगी।

उत्तर-पश्चिम दिल्ली की पुरानी समस्या का समाधान…
उत्तर-पश्चिम दिल्ली में किराड़ी से रिठाला (रोहिणी के पास) तक प्रस्तावित 7,200 मीटर लंबे ट्रंक ड्रेन का निर्माण एक और महत्वपूर्ण परियोजना है। डीडीए की इस परियोजना की अनुमानित लागत 250.21 करोड़ रुपये है और इसकी डिजाइन डिस्चार्ज क्षमता 1,160 क्यूसेक रखी गई है। वर्तमान स्थिति में इस नाले का लगभग 600 मीटर निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। बचा कार्य 84 पेड़ों की कटाई की अनुमति लंबित होने के कारण रुक गया था, जिसे अब सुलझा लिया गया है।

रोहतक रोड पर स्टॉर्म वॉटर ड्रेन का सुधार कार्य…
इसके अलावा, रोहतक रोड (एनएच-10) पर जल निकासी व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए स्टॉर्म वॉटर ड्रेन का सुधार का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। पीडब्ल्यूडी की इस परियोजना के अंतर्गत नांगलोई रेलवे मेट्रो स्टेशन के पास किराड़ी सुलेमान ड्रेन से हिरण कूदना ड्रेन (मेट्रो पिलर संख्या 428 से 626) और टीकरी बॉर्डर से हिरण कूदना ड्रेन (मेट्रो पिलर संख्या 753 से 626) तक दोनों तरफ ड्रेन का निर्माण व सुधार किया जा रहा है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 184 करोड़ है जिसमें से भारत सरकार ने ‘पूंजी निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता’ योजना के अंतर्गत 105 करोड़ 2025-26 में दिए हैं। इस परियोजना को मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

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