बीमा कंपनी की मनमानी पर करारा प्रहार, 3 करोड़ रुपये की बीमा राशि देने का आदेश
कंपनी ने पॉलिसी के समय बीमारियों की जानकारी छिपाने की बात कहकर क्लेम किया था खारिज...

नई दिल्ली, कंज्यूमर खबर। चार साल तक चली कानूनी लड़ाई के बाद नई दिल्ली जिला उपभोक्ता अदालत ने बीमा कंपनी की मनमानी पर करारा प्रहार किया है। अदालत ने आदित्य बिड़ला सन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को दिवंगत योगेश गुप्ता के परिजनों को 3 करोड़ रुपये की बीमा राशि चुकाने का आदेश दिया है। कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया था कि योगेश गुप्ता ने पॉलिसी लेते समय अपनी पुरानी बीमारियों की जानकारी छिपाई थी, लेकिन अदालत में यह दलील टिक नहीं सकी। सुनवाई के दौरान कंपनी कोई ठोस और विश्वसनीय सबूत पेश नहीं कर पाई। अदालत ने स्पष्ट कहा कि बिना पुख्ता साक्ष्य के क्लेम खारिज करना सेवा में गंभीर कमी है। पीठ की अध्यक्ष पूनम चौधरी और सदस्य शेखर चंद्रा ने 6 जनवरी 2026 को यह फैसला सुनाते हुए कंपनी को निर्देश दिया कि वह भुगतान के साथ क्लेम की तारीख से भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी अदा करे। इसके अलावा, परिवार को मुकदमे के खर्च के रूप में 25,000 रुपये भी देने होंगे।
पीठ ने कहा कि यदि कंपनी चार सप्ताह के भीतर राशि का भुगतान नहीं करती है, तो देय ब्याज बढ़कर 9 प्रतिशत वार्षिक हो जाएगी। फैसला सुनाते समय पीठ ने तीन अहम पहलुओं पर जोर दिया। पहला, योगेश गुप्ता की मौत कोविड-19 संक्रमण के कारण हुई थी, न कि किसी पुरानी बीमारी से। इस संदर्भ में अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि कोविड से हुई मौत के मामलों में बीमा क्लेम रोकना गलत है। दूसरा, बीमा पॉलिसी जारी करने से पहले कंपनी ने खुद मेडिकल जांच कराई थी, जिसमें कोई गंभीर बीमारी सामने नहीं आई, इसलिए बीमारी छिपाने का आरोप भी गलत है। तीसरा, इसके अलावा, मौत का वास्तविक कारण डायबिटीज नहीं, बल्कि कोविड था। अदालत ने इस मामले में पुराने राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के फैसलों का हवाला दिया।
यह था मामला
मार्च 2020 में योगेश गुप्ता ने 3 करोड़ रुपये की लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी, जिसकी पहली किस्त के रूप में उन्होंने 30 लाख रुपये भी जमा किए। कंपनी ने उनके मेडिकल टेस्ट भी करवाए, जिसमें कोई गंभीर समस्या नहीं पाई गई, लेकिन एचबीए1सी लेवल 5.6 फीसदी था, जो सामान्य था और डायबिटीज के कोई संकेत नहीं था। इसके बाद पॉलिसी 2020 में जारी हुई। अप्रैल 2021 में योगेश कोविड-19 से संक्रमित हो गए और दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती हुए। उनकी हालत गंभीर हो गई और 8 मई 2021 को उनकी मौत हो गई। अस्पताल की रिपोर्ट में मौत का मुख्य कारण गंभीर कोविड निमोनिया बताया गया, जबकि डायबिटीज और हाइपोथायरायडिज्म के बारे में भी जिक्र था। योगेश की पत्नी कविता गुप्ता और उनके दो बच्चे बेटी रिचा और बेटा वरुण ने मई 2021 में क्लेम दाखिल किया, लेकिन कंपनी ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद परिवार ने फरवरी 2022 में दिल्ली उपभोक्ता अदालत में शिकायत दर्ज करवाई।




