आईआईटी दिल्ली, रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए युवा फैकल्टी को मिलेगा फंड
आईआईटी दिल्ली में रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए एक नई शुरुआत की गई है। इसके जरिए आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर्स अपनी रिसर्च में वित्तीय व अन्य मदद हासिल कर सकते हैं। 45 साल या उससे कम उम्र के शिक्षकों को इसका लाभ...

नई दिल्ली, कंज्यूमर खबर। आईआईटी दिल्ली में रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए एक नई शुरुआत की गई है। इसके जरिए आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर्स अपनी रिसर्च में वित्तीय व अन्य मदद हासिल कर सकते हैं। 45 साल या उससे कम उम्र के शिक्षकों को इसका लाभ मिलेगा। इस योजना के अंतर्गत रिसर्च के लिए अलग से फंड मुहैया कराया जाएगा। योजना के तहत मिलने वाला फंड काफी फ्लेक्सिबल है। यानी इसका इस्तेमाल नई मशीनें खरीदने, सॉफ्टवेयर लेने, उन्हें प्रयोग करने, फील्ड में काम करने, प्रोटोटाइप बनाने या पोस्ट-डॉक्टरल रिसर्चर रखने के लिए किया जा सकता है।
इसके अलावा, इंडस्ट्री और दूसरी संस्थाओं के साथ मिलकर काम करने को भी बढ़ावा दिया जाएगा ताकि रिसर्च का लाभ सीधे जमीन पर आ सके और पेटेंट बनें व नई टेक्नोलॉजी सामने आए। दरअसल, आईआईटी दिल्ली ने एक नया कार्यक्रम शुरू किया है जिसका नाम है दीपक राघवन फैमिली फाउंडेशन एक्सेलरेटर प्रोग्राम।
इसका मकसद आईआईटी दिल्ली के होनहार और युवा प्रोफेसरों को रिसर्च में आगे बढ़ने में मदद करना है। इस कार्यक्रम के तहत 45 साल या उससे कम उम्र के शिक्षकों को 5 साल के लिए एंडोव्ड चेयर प्रोफेसर बनाया जाएगा। आईआईटी दिल्ली के मुताबिक ऐसे फ़ैकल्टी को रिसर्च के लिए अलग से फंड मिलेगा, रिसर्च स्टाफ मिलेगा।
इसके साथ ही साथ उन्हें रिसर्च के लिए आवश्यक जरूरी संसाधन भी दिए जाएंगे। यह इसलिए किया जा रहा है ताकि फैकल्टी बिना रुकावट अपनी रिसर्च कर सकें और साथ-साथ पढ़ाई से जुड़ी अकादमिक जिम्मेदारियां भी निभा सकें। इतना ही नहीं, हर पांच साल में एक पूरी तरह से फंडेड पीएचडी फेलोशिप भी दी जाएगी। पीएचडी फेलोशिप के यह छात्र चेयर प्रोफेसर के साथ मिलकर काम करेंगे और उन्हें भारत एवं विदेश में होने वाली कॉन्फ्रेंस में जाने का मौका भी मिलेगा, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय अनुभव मिल सकेगा।
आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी का कहना है कि आईआईटी दिल्ली में देश के बेहतरीन रिसर्चर हैं। ऐसे नए कार्यक्रम इन रिसर्चर्स को और बेहतर काम करने के लिए प्रेरित करते हैं। इससे आने वाले समय में भारत रिसर्च और इनोवेशन में आगे बना रहेगा।




