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गलत तरीके से हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम खारिज, बीमा कंपनी को देना होगा 2.79 लाख देने का आदेश

जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, नई दिल्ली ने स्वास्थ्य बीमा दावा गलत तरीके से खारिज करने के मामले में स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी को उपभोक्ता को इलाज खर्च का भुगतान करने का आदेश...

नई दिल्ली, कंज्यूमर खबर। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, नई दिल्ली ने स्वास्थ्य बीमा दावा गलत तरीके से खारिज करने के मामले में स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी को उपभोक्ता को इलाज खर्च का भुगतान करने का आदेश दिया। दरअसल, बीमा कंपनी ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया था कि इलाज उसकी सूची में शामिल न होने वाले अस्पताल में हुआ है, लेकिन आयोग के सामने यह दलील टिक न सकी। सुनवाई के दौरान कंपनी कोई ठोस और विश्वसनीय सबूत पेश नहीं कर पाई। अदालत ने स्पष्ट कहा कि बिना पुख्ता साक्ष्य के क्लेम खारिज करना सेवा में गंभीर कमी है। पीठ की अध्यक्ष पूनम चौधरी, सदस्य बरीक अहमद और शेखर चंद्र ने 30 जनवरी 2026 को यह फैसला सुनाते हुए कंपनी को निर्देश दिया कि वह इलाज में खर्च के भुगतान के साथ क्लेम की तारीख से भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी अदा करे। इसके अलावा, परिवार को मानसिक प्रताड़ना के रूप में 50,000 और मुकदमे के खर्च के रूप में 10,000 रुपये भी देने होंगे।
पीठ ने कहा कि यदि कंपनी चार सप्ताह के भीतर राशि का भुगतान नहीं करती है, तो देय ब्याज बढ़कर 12 प्रतिशत वार्षिक हो जाएगी। फैसला सुनाते हुए पीठ ने कहा कि बीमा कंपनी यह साबित करने में विफल रही कि पॉलिसी की शर्तें, एक्सक्लूजन क्लॉज या एक्सक्लूडेड अस्पतालों की सूची उपभोक्ता को कभी दी गई थी। केवल वेबसाइट पर जानकारी डालना पर्याप्त नहीं माना जाएगा। साथ ही शर्तों के अनुसार भी ऐसी स्थिति में इलाज खर्च कम से कम स्थिरीकरण तक देय होता है। आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए आयोग ने बीमा कंपनी की दलीलों को खारिज कर दिया।
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यह था मामला
21 जून 2023 को ककरौला के भारत विहार निवासी श्रीपाल ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी से पांच लाख रुपये का हेल्थ इंश्योरेंस लिया। इसके बाद दिसंबर 2023 में उनकी तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ने पर आपात स्थिति में उन्हें पास के आनंद अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां 23 दिसंबर 2023 से 3 जनवरी 2024 तक उनका इलाज चला। इलाके और इसके बाद उनका 2,19,326 रुपये का भुगतान अपने पास से कर दिया। इसके बाद उन्होंने उसी समय उपभोक्ता ने इंश्योरेंस कंपनी को राशि को वापस पाने के लिए क्लेम सबमिट किया। लेकिन 7 फरवरी 2024 को कंपनी ने उनका क्लेम यह कहकर खारिज कर दिया कि उन्होंने बीमार व्यक्ति का इलाज पैनल में शामिल न होने वाले अस्पताल में एडमिट किया गया था और वहीं पर उनका इलाज किया गया था।
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