दुनियादेश

सांस्कृतिक विरासत और धर्म – विज्ञान का पुनरुद्धार

वसुधैव कुटुम्बकम्

नई दिल्ली। वसुधैव कुटुम्बकम् की अवधारणा को समावेश करने वाला बौद्धिक नीति का मर्मज्ञ भारत प्राचीन संस्कृति और विरासत के पुनरुत्थान के प्रति प्रतिबद्ध है। आधुनिक भारत विश्व शक्ति के रूप में उभर रहा है। धर्म और विज्ञान के क्षेत्र में भारत दुनिया का मार्गदर्शक बन गया है। भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पृष्ठभूमि अनादिकाल से पुरुषार्थ और परमार्थ का स्मरण कराती रही है। भारत की आलौकिकता से दुनिया भाव विभोर होती है। भारतीय संस्कृति और परम्पराओं का अनुसरण दुनिया के कई देश करते है, यहां का पहनावा, रीती-रिवाज, खान -पान, त्योहार, तप-जप और चेतना समेत अनेक आयामों को पसंद किया जा रहा है। भारत धर्म और विज्ञान के क्षेत्र में अपनी उत्कृष्टता से दुनिया को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। आधुनिक काल खण्ड में भारत ने धर्म और विज्ञान के क्षेत्र में कई वैश्विक स्तर पर कीर्तिमान स्थापित किए हैं। जो संपूर्ण विश्व के लिए प्रेरणा का स्त्रोत बने हैं।
आजाद भारत के बाद देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए कई राजनेताओं ने शीर्ष पद संभाला, राजनीति में धर्म, जाति, समुदाय का विष बो दिया गया, जहां से आजाद होने के बावजूद जनमानस की विचारधारा में मतभेद रूपी अंकुर उपज गया, धीरे – धीरे उसकी शाखाएं देश के कोने – कोने में फैल गईं। नवोत्थान की विचार धारा से कोसों दूर सिर्फ नफरत का बीज ही बोया गया। हमारी सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिकता का विलय होता गया। 1950 से 1998 तक भारत में कांग्रेस ने सत्ता संभाली, इस बीच कुछ फैसले उचित लिए गए, लेकिन धर्म , विज्ञान और संस्कृति के दृष्टिकोण से कांग्रेस ने कोई महत्व पूर्ण कदम नहीं उठाया। 1998 से 2003 में भारतीय जनता पार्टी से अटल बिहारी वाजपेई ने जीत दर्ज की, उनके कार्यकाल को सदैव याद किया जाता है, उन्होंने भारत के प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों का प्रोत्साहन किया, अपने फैसलों से अमेरिका जैसे महाशक्तियों को मुंह तोड़ जबाव दिया।
2004 में कांग्रेस की वापसी हुई, कांग्रेस की विचारधारा आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और धर्म विज्ञान के क्षेत्र में कभी सक्रिय नहीं रही। देश की जनता ने कांग्रेस के रवैए को देखते हुए, 2014 में बड़ा झटका दिया।
2014 में समृद्ध भारत और विकसित भारत, युग परिवर्तन करता नया भारत के संकल्प को लेकर जनता के अपार समर्थन से बीजेपी को शानदार जीत मिली। नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने भारत के शीर्ष पद का नेतृत्व संभाला। उनकी राष्ट्रीय नीति, विदेश नीति, कानून नीति, ने भारत की दिशा को नया सवेरा प्रदान किया। स्वच्छ भारत से देश की सैंदर्यता और हरियाली पर जोर दिया। उनकी विचारधारा आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वैभव के प्रति प्रतिबद्ध रही। भारत को वैश्विक स्तर पर समृद्ध बनाने के लिए नरेंद्र मोदी ने कूटनीति का अवलोकन किया। दुनिया के सुपर पावर कहे जाने वाले देश भारत की राह देखते नजर आते हैं। देश में नरेंद्र मोदी के नेतेत्व में कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए, जिसमें अनुच्छेद 370 से कश्मीर को मुक्त करना, नोटबंदी से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना, पाकिस्तान की क्रूर हरकतों को करारा जबाव देना, राफेल विमान, सैन्य ताकत को शसक्त बनाने में कई कंपनियों के साथ मिसाइल, और एयर क्राफ्ट तैयार करना, देश के हर परिवार तक आर्थिक लाभ, राशन, हर घर जल, किसानों का सम्मान, सैनिकों का मान और देश के स्वाभिमान के प्रति नवोत्थान की दिशा प्रतिस्थापित हुई।

आधुनिक भारत में विकास भी विरासत भी
इसरो के महान वैज्ञानिकों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने निरंतर प्रोत्साहित किया, इसरो द्वारा दो बार असफलता मिलने के बाद 2023 में ऐतिहासिक सफलता की गौरवगाथा लिख दी। चंद्रयान 3 को दक्षिणी ध्रुव में लैंड करवाना असंभव था, ऐसा करने वाला भारत विश्व का पहला देश बना, भारत के प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा धन्यवाद दिया गया, उन्हें अग्रिम मिशन के लिए प्रेरित किया गया। इसरो ने आदित्य एल 1 की सफल लॉन्चिंग की, और एल 1 से सूर्य की आभा की कुछ पिक्चर भेजी। इसरो द्वारा रचे गए इतिहास को दुनिया ने सराहना की, साथ ही अमेरिका, रूस और जापान समेत कई देश इसरो के साथ काम करने के लिए आगे आ रहे हैं।

मोदी सरकार में युग परिवर्तन : भारत आध्यात्मिक दृष्टि से दैविक रहस्यों और ऋषि मुनियों के दैविक शक्तियों से समावेश है। मुगल और ब्रिटिश हुतुमत में भारत की प्राचीन विरासतों को विलुप्त करने का पूर्ण प्रयास किया गया, करीब 48,000 हिंदू मंदिरों को क्षति ग्रस्त किया गया। स्वतंत्रता के उपरांत कांग्रेस ने आध्यात्मिकता पर कभी ध्यान केंद्रित नहीं किया।
2014 में देश को नरेंद्र मोदी प्रधान मंत्री के रूप में प्राप्त हुआ, भारत की प्राचीन विरासतों के पुनरुद्धार में नरेंद्र मोदी सदैव प्रतिबद्ध हैं। काशी विश्वनाथ कोरी डोर, वाराणसी, महाकाल कोरिडोर उज्जैन, केदारनाथ, बद्रीनाथ, संगम, प्रयागराज, समेत दुनिया के सभी प्रतिष्ठित धार्मिक मंदिरों को भव्य दिव्य और नव्य स्वरूप दिया। 500 वर्षों से इंतजार करते राम भक्तों को न्याय मिला, अयोध्या त्रेतायुग की कल्पना के आधार पर विकसित हुई, वहां भगवान श्री राम लला सरकार का दिव्य भव्य मंदिर निर्माण हुआ, 22 जनवरी को श्री राम लला सरकार की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा राम लला सरकार को विधिवत विराजमान किया गया। देश विदेश की दिग्गज हस्तियां राम नाम में सराबोर होती दिखी। श्री राम लला सरकार की प्राण प्रतिष्ठा के आयोजन की खुशी में पूरे देश में उत्सव मनाया गया, हर घर दीवाली मनाई गई, इसके अलावा दुनिया के करीब 57 देशों में राम नाम की गूंज सुनाई दी।
मोदी की गारंटी, मोदी का संकल्प, विकसित भारत की मजबूत राह, नए युग का नया भारत ।।

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