भारत के चार राज्यों में बनेगा रेयर अर्थ कॉरिडोर
केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में चार खनिज समृद्ध राज्यों को समर्पित दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (रेयर अर्थ कॉरिडोर) बनाए जाने की घोषणा...

नई दिल्ली, कंज्यूमर खबर। केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में चार खनिज समृद्ध राज्यों को समर्पित दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (रेयर अर्थ कॉरिडोर) बनाए जाने की घोषणा की। इससे भारत में मैन्युफैक्चरिंग के साथ ही ईवी, रिन्यूएबल एनर्जी और डिफेंस की जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा। भारत दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ पड़ोसी देश चीन पर बनी निर्भरता को भी काफी हद तक कम कर पाएगा। अंतराष्ट्रीय जगत में चीन के इस क्षेत्र में बने दबदबे को कम करने के उद्देश्य से अमेरिका, आस्ट्रेलिया और स्वीडन भी अपने यहां खोज को रफ्तार दे चुके हैं।
वित्त मंत्री ने कहा कि नवंबर, 2025 में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स की स्कीम लॉन्च की गई थी। अब बजट में ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे मिनरल-रिच राज्यों को सपोर्ट करेंगे, ताकि डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर स्थापित किए जा सकें। इसका मकसद भारत के घरेलू मैन्युफैक्चरिंग आधार को मजबूत करना और जरूरी मिनरल्स के आयात पर निर्भरता को कम करना है। अब दुर्लभ खनिज के क्षेत्र में भारत भी भविष्य में दुनिया से कदम से कदम मिलाकर चलेगा। इन क्षेत्रों को सरकार से केंद्रित समर्थन मिलने से रेयर अर्थ मिनरल्स के लिए एक घरेलू इकोसिस्टम बनाने में मदद मिलेगी। यह सिर्फ माइनिंग तक ही सीमित नहीं रहेगा। इसकी बजाय उच्च-मूल्य वाली गतिविधियों को भी शामिल करेगा। समय के साथ इस विजन से भारतीय कंपनियों को कच्चे माल के सप्लायर बने रहने के बजाय वैल्यू चेन में ऊपर उठने में मदद मिलेगी।
चीन ने अपनी इसी ताकत के बल पर पिछले दिनों अमेरिका को भी विवश कर दिया
वर्तमान में भारत की पड़ोसी देशों से बनी रस्साकशी और बदलते समय को देखते हुए बेहद जरूरी था कि इस दिशा में कदम उठाया जाए। भविष्य को ध्यान में रखते हुए भारत के चार राज्यों में शुरू किया जाने वाला यह प्रयास निश्चित ही सार्थक सिद्ध होगा।
यह देश की मैन्युफैक्चरिंग और प्रौद्योगिकी पहलों को मजबूत करेगा। इन कॉरिडोर का मकसद माइनिंग, प्रोसेसिंग, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को एक साथ लाकर भारत के रेयर अर्थ उद्योग को पुनर्गठित करना है। इससे भारत में मैन्युफैक्चरिंग के साथ ही ईवी, रिन्यूएबल एनर्जी और डिफेंस की जरूरतों को सुरक्षित किया जा सके।
एक नजर दौड़ाएं तो जानकारी के मुताबिक कई दशक से चीन रेयर अर्थ इकोसिस्टम में काबिज है। यह ग्लोबल रेयर अर्थ माइनिंग उत्पादन का लगभग 60 फीसदी हिस्सा है। परिष्कृत उत्पादन और दुर्लभ पृथ्वी चुंबक निर्माण का यह लगभग 90 फीसदी कंट्रोल करता है। इस प्रभुत्व ने बीजिंग को दुनिया भर के उन उद्योगों पर महत्वपूर्ण प्रभाव दिया है, जो इन सामग्रियों पर निर्भर हैं। चीनी रेयर अर्थ सप्लाई पर निर्भर देशों को निर्यात नीतियों में समायोजन होने पर बार-बार अनेक चुनौती का सामना करना पड़ा है। 2025 के अंत में ही चीन ने कुछ भारी दुर्लभ पृथ्वी तत्वों पर निर्यात लाइसेंसिंग आवश्यकताएं लागू कीं। बाद में कुछ प्रतिबंधों पर अस्थायी रोक की घोषणा कर दी गई, लेकिन इस घटना ने एक ही सप्लायर यानी चीन पर अत्यधिक निर्भर होने की चिंता के कारण सोचने पर विवश कर दिया क्योंकि आयात रुकने की सूरत में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों से लेकर रक्षा क्षेत्र में हो रहे निर्माण उद्योगों के प्रभावित होने की आशंका पनपती है, लेकिन अब भारत दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के क्षेत्र में आगे बढ़ेगा।




