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Delhi Riots: अंकित के हत्यारों को उम्रकैद, कोर्ट ने कहा फांसी आखिरी विकल्प

Delhi Riots के दौरान बेहद बर्बर तरीके से हुई आईबी अधिकारी Ankit Sharma की हत्या के मामले में Karkardooma Court ने Tahir Hussain सहित अन्य दोषियों को Life imprisonment की सजा सुनाई है। हांलाकि Delhi Police ने इस मामले में सभी दोषियों को फांसी की सजा देने की पुरजोर वकालत की थी और इसे "दुर्लभतम से दुर्लभ" मामला बताया था।

Consumer Khabar: Delhi Riots के दौरान बेहद बर्बर तरीके से हुई आईबी अधिकारी Ankit Sharma की हत्या के मामले में Karkardooma Court ने Tahir Hussain सहित अन्य दोषियों को Life imprisonment की सजा सुनाई है। हांलाकि Delhi Police ने इस मामले में सभी दोषियों को फांसी की सजा देने की पुरजोर वकालत की थी और इसे “दुर्लभतम से दुर्लभ” मामला बताया था। हांलाकि दिल्ली पुलिस की तमाम दलीलों के बाद भी कोर्ट ने पांचों दोषियों ताहिर हुसैन, जावेद, नाजिम, कासिम और अनस को हत्या और दंगा भड़काने (inciting a riot) का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। 13 जुलाई को कोर्ट ने पांचों को आईपीसी की धारा 188, 153ए, 147, 148, 149, 365 (अपहरण) और 302 (हत्या) के तहत दोषी ठहराया था। हांलाकि, सजा सुनाने के दौरान कोर्ट ने माना की अंकित शर्मा की हत्या न केवल बेहद बर्बर तरीके से की गई बल्कि दोषियों ने हैवानियत की सारी हदों को भी पार कर दिया था।

मौत की सजा आखिरी विकल्प: कोर्ट

कोर्ट नेताहिर सहित अन्य दोषियों को फांसी (Execute) की बजाए उम्रकैद की सजा सुनाते हुए माना की उनमें अभी सुधार की संभावना है। कोर्ट ने अभियोजन की इस दलील को खारिज कर दिया कि दोषी सुधर नहीं सकते या उनका स्वभाव इतना बुरा है कि जेल में रहने पर भी वे समाज के लिए खतरा बने रहेंगे। कोर्ट ने कहा कि यह स्थापित कानून है कि मौत की सजा आखिरी विकल्प के तौर पर ही दी जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि उसे अपराध और अपराधी, दोनों के हिसाब से सही सजा तय करने के लिए अपराध को गंभीर बनाने वाली और सजा कम करने वाली, दोनों तरह की परिस्थितियों पर विचार करना पड़ेगा। कोर्ट ने कहा कि किसी मामले भी मामले को “दुर्लभतम से दुर्लभ” मामलों की श्रेणी में रखने के लिए अपराध और अपराधी, दोनों पर ही विचार किया जाना जरुरी है।

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घटना आत्मा को झकझोर देने वाली: कोर्ट

दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए कोर्ट ने माना की हमला इतना जबरदस्त, लगातार और इतनी नज़दीक से किया गया था कि मरने के बाद भी शरीर तुरंत ज़मीन पर नहीं गिरा और पीड़ित के शरीर को किसी जानवर की तरह बांधा गया और घसीटते हुए चांद बाग पुलिया तक ले जाया गया। कोर्ट ने कहा कि जिस बर्बरता के साथ यह भयानक हत्या की गई, वह घिनौनी और विचलित करने वाली है। हांलाकि, कोर्ट ने यह भी माना की सभी दोषी अपने-अपने परिवारों के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं और इस तथ्य को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि देश की आपराधिक न्याय व्यवस्था में मौत की सजा तभी दी जाती है, जब यह साबित हो जाए की दोषी अपराध की राह पर इतना आगे निकल चुका है कि अब वापसी मुमकिन नहीं है, और वह समाज के लिए इतना बड़ा खतरा बन गया है कि उससे समाज को छुटकारा दिलाना ज़रूरी है।

कम पढ़ा लिखा होना सजा कम करने की वजह नहीं: कोर्ट

बचाव पक्ष द्वारा दोषियों को जावेद, कासिम, नाजिम के अनपढ़ होने और अनस के कम पढ़ा लिखा होने के आधार पर सजा में नरमी की अपील पर कोर्ट ने कहा कि कम पढ़े-लिखे होने को सजा कम करने की वजह नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि पढ़ाई-लिखाई और अपराध करने के बीच कोई पक्का संबंध नहीं है। कोर्ट ने कहा कि हालांकि, यह अपराध ऐसे समय में किया गया था जब कुछ खास हितों वाले लोगों ने गलत जानकारी फैलाकर धार्मिक उन्माद भड़का दिया था। ऐसे में दोषियों की शैक्षिक पृष्ठभूमि, खासकर गलत जानकारी और सांप्रदायिक उन्माद से भरे माहौल में उनके बहकावे में आने की संभावना, सजा तय करते समय एक अहम बात है जिस पर विचार किया जाना चाहिए।

ताहिर पर हमले के लिए अपने घर को launching pad बनाने का आरोप कमजोर

कोर्ट ने अभियोजन के इस दावे से भी असहमति जताई कि ताहिर हुसैन ने अपने घर का इस्तेमाल नागरिकों और कानून लागू करने वाली एजेंसियों पर पत्थर, ईंट, पेट्रोल बम और एसिड बम से हमले करने के लिए एक बेस के तौर पर किया और गैर-कानूनी भीड़ को उकसाया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष इन आरोपों को साबित करने में नाकाम रहा है कि ताहिर हुसैन ने गैर-कानूनी भीड़ की मदद की, उसे उकसाया या उसकी अगुवाई की।

हमने राज्य की ओर से, ताहिर हुसैन समेत दोषी लोगों के बर्बर कृत्य के लिए उन्हें मौत की सजा देने की मांग की थी। हालाकि, कोर्ट ने नरमी बरतने वाले पहलुओं पर विचार करते हुए दोषियों को आजीवन कारावास की सज़ा देना उचित समझा।

-मधुकर पांडेय, एसपीपी
-डी. के. भाटिया, एसपीपी

अंकित हत्याकांड की टाइमलाइन ?

  • 25 फरवरी 2020- अंकित शर्मा की हत्या
  • 26 फरवरी 2020- दयालपुर थाने में एफआईआर दर्ज
  • 3 जून 2020- पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की
  • 5 फरवरी 2021- पुलिस ने पहला पूरक आरोपपत्र दाखिल किया
  • 21 अगस्त 2020- कोर्ट ने आरोपपत्र पर संज्ञान लिया
  • 23 जून 2022- पुलिस ने दूसरा पूरक आरोपपत्र दाखिल किया
  • 9 दिसंबर 2022- पुलिस ने तीसरा पूरक आरोपपत्र दाखिल किया
  • 23 मार्च 2023- कड़कड़डूमा कोर्ट ने 11 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए
  • 13 जुलाई 2026- पांच को दोषी ठहराया, छह को बरी किया
  • 27 जुलाई 2026- सजा पर बहस, अभियोजन पक्ष ने दोषियों के लिए मांगी फांसी
  • 31 जुलाई 2026- अदालत ने दोषियों को सुनाई उम्रकैद की सजा

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(फोटो साभार-सोशल मीडिया)

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