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Garbage-free India: स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहरों को बनाया जा रहा कचरा मुक्त

आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) के मार्गदर्शन में स्वच्छ भारत मिशन - शहरी (SBM-U) 2.0 के अंतर्गत देशभर के शहरों को 'कचरा मुक्त' बनाने के लिए लगातार काम कर रहा है। वहीं इस National Campaign का एक मुख्य उद्देश्य शहरों में 'सर्कुलर इकोनॉमी' को बढ़ावा देकर अपशिष्ट को दोबारा इस्तेमाल में लाना और कचरे को उपयोगी संसाधन में परिवर्तित करना भी है। इसी दिशा में, मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर ग्वालियर ने भी एक अनोखा कदम उठाया है।

Consumer Khabar: आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) के मार्गदर्शन में स्वच्छ भारत मिशन – शहरी (SBM-U) 2.0 के अंतर्गत देशभर के शहरों को ‘कचरा मुक्त’ बनाने के लिए लगातार काम कर रहा है। वहीं इस National Campaign का एक मुख्य उद्देश्य शहरों में ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ को बढ़ावा देकर अपशिष्ट को दोबारा इस्तेमाल में लाना और कचरे को उपयोगी संसाधन में परिवर्तित करना भी है। इसी दिशा में, मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर ग्वालियर ने भी एक अनोखा कदम उठाया है। ग्वालियर नगर निगम (GMC), शहर से निकलने वाले वस्त्र अपशिष्ट (Textile Waste) यानी कपड़े के कचरे को पर्यावरण के लिए समस्या मानने के बजाय एक अवसर के रूप में देख रहा है और यहां विशेष अभियान की कमान शहर के युवाओं और महिलाओं के हाथों में सौंपी जा रही है।

ग्वालियर से प्रतिदिन लगभग 550 टन ठोस कचरा निकलता है

Gwalior शहर से प्रतिदिन लगभग 500 से 550 टन ठोस कचरा निकलता है, जिसमें एक निश्चित हिस्सा पुराने कपड़ों और कतरनों का होता है। सरकारी अध्ययनों और आंकड़ों के अनुसार, इस कुल कचरे में कपड़ों की हिस्सेदारी लगभग 1.12% से 5.54% के बीच होती है। इसका सीधा मतलब यह है कि हर दिन लगभग 5 से 30 टन तक कपड़ा कचरा सीधे Dumping yard and landfill की तरफ बढ़ता था। वर्तमान समय में कपड़ों के निर्माण के दौरान सिंथेटिक और पॉलिस्टर का इस्तेमाल ज्यादा होता है, इसलिए इन्हें नष्ट होने में सैकड़ों साल लग जाते हैं। इस चुनौती को देखते हुए नगर निगम ने ‘टेक्सटाइल वेस्ट रीसाइक्लिंग’ से युवाओं को जोड़ने की दिशा में प्रभावी कदम बढ़ाया।

शून्य अपशिष्ट‘ की पहल

अभियान का पहला चरण युवाओं की नई सोच को स्वच्छता के कार्यों से जोड़ना था। ग्वालियर नगर निगम ने ऋतुवा कॉउचर की रिया शर्मा जैसे स्थानीय युवा डिजाइनर्स के साथ मिलकर शून्य – फ्रॉम वेस्ट टू वर्थ जैसी परियोजना की शुरुआत की प्रोजेक्ट को ‘लैंडफिल से हथकरघे तक‘ और ‘कतरन से कलाकृति’ के बेहद असरदार विज़न के साथ आगे बढ़ाया गया है साधारण Recycling से आगे बढ़कर युवा इनोवेटर्स ने डंपिंग साइट्स और घरों से एकत्रित बेकार कपड़ों को कला से जोड़ा। नतीजा यह हुआ कि जिस कपड़े को लोग फेंक चुके थे, उससे शानदार जैकेट और आधुनिक ट्राउजर जैसे ‘फैशनेबल’ कपड़े तैयार कर दिए गए। युवाओं ने लगभग 1.5 से साल की अवधि में इकट्ठा किए गए कपड़े के टुकड़ों को जोड़ा और महीने की मेहनत के बाद बेकार कपड़ों को कीमती परिधानों में बदला गया। नगर निगम ने इस अभिनव प्रयास पर आधारित ‘शून्य’ नाम से एक आधिकारिक डॉक्यूमेंट्री भी बनाई है, जो दूसरे युवाओं को भी कचरा प्रबंधन के प्रति जागरूक कर रही है।

Textile waste से जुड़े संसाधन

ग्वालियर नगर निगम ने रिड्यूस, रीयूज़, रीसाइकल (Reduce, Reuse, Recycle-3R) की अवधारणा अपनाते हुए शहर के अलग-अलग इलाकों में 6 स्थायी आरआरआर केंद्र स्थापित किए हैं, जिनकी संख्या विशेष स्वच्छता अभियानों के दौरान बढ़ाकर 18 से 2 तक कर दी जाती है। इन केंद्रों पर नागरिक पुराने और बेकार कपड़े दान करते हैं, फिर कपड़ों की छंटाई की जाती है जो कपड़े अच्छी स्थिति में होते हैं, उन्हें साफ करके “स्लम हाट” या “नेकी की दीवार” के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों को मुफ्त दे दिया जाता है। जो कपड़े पहनने लायक नहीं होते, उन्हें नगर निगम की देखरेख में चल रहे महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) को सौंप दिया जाता है। यहां महिलाओं को ट्रेनिंग देकर पुराने कपड़ों से 50 हजार थैले बनाने का लक्ष्य दिया गया है, जो प्लास्टिक बैग को पूरी तरह खत्म करने के लिए स्थानीय बाजारों और स्कूलों में बांटे जा रहे हैं।

केदारपुर प्लांट की भूमिका

वस्त्र अपशिष्ट प्रबंधन को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए ग्वालियर ने तकनीकी स्तर पर भी बड़ी सफलता हासिल की है। वर्तमान में ग्वालियर के मुख्य लैंडफिल साइट पर 250 टीडीपी (टन प्रतिदिन) क्षमता की सूखा कचरा प्रसंस्करण इकाई काम कर रही है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के नियमों के तहत केदारपुर में लगभग 75.27 करोड़ की लागत से एक आधुनिक कचरा प्रसंस्करण और मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) बनाई जा रही है। यहां स्वचालित मशीनों के जरिए मिश्रित कचरे से कपड़ों को पूरी तरह अलग किया जाता है। इस अलग किए गए वेस्ट को रीसाइक्लिंग करने वाले रजिस्टर्ड वेंडर्स को भेजा जाता हैजो इससे फैक्ट्रियों के लिए साफ-सफाई के कपड़े या इंसुलेशन सामग्री तैयार करते हैं। इसी के साथकेदारपुर साइट पर बरसों से मौजूद 6.03 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे के ढेर को 90 प्रतिशत वैज्ञानिक तर के से तेजी से साफ़ किया जा चुका है।

यह कहानी केवल कचरे के निपटारे की नहीं है, बल्कि इस बात का प्रमाण भी है कि प्रशासनिक सहयोग, युवाओं की रचनात्मकता और जनता की भागीदारी कैसे एक सुरक्षित भविष्य का निर्माण कर सकते हैं। ग्वालियर का विज़न शहर को ‘जीरो वेस्ट सिटी’ के रूप में स्थापित करना है, जहां वस्त्र अपशिष्ट का एक भी धागा लैंडफिल तक न पहुंचे।

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