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हेयर ट्रांसप्लांट में डॉ. हरोर्स वेलनेस की नई UR-HT तकनीक, ग्राफ्ट सर्वाइवल और डेंसिटी में 25-30% बेहतर परिणाम का दावा

Hair Transplant: डॉ. हरोर्स वेलनेस की UR-HT तकनीक, 25-30% बेहतर परिणाम का दावा

नई दिल्ली: हेयर ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में डॉ. हरोर्स वेलनेस ने अपनी स्वामित्व वाली Ultra Receptive Hair Transplant (UR-HT) तकनीक को पेश किया है। क्लीनिक का दावा है कि इस तकनीक के जरिए पारंपरिक हेयर ट्रांसप्लांट प्रक्रियाओं की तुलना में ग्राफ्ट सर्वाइवल, हेयर डेंसिटी और ओवरऑल ट्रांसप्लांट रिजल्ट में 25-30% तक बेहतर परिणाम देखने को मिल रहे हैं।

क्लीनिक के अनुसार, UR-HT तकनीक को उसके संस्थापक डॉ. नवनीत हरोर्स ने इन-हाउस विकसित किया है। तकनीक का मुख्य उद्देश्य हेयर ट्रांसप्लांट के दौरान स्कैल्प से निकाले गए हेयर ग्राफ्ट को शरीर के बाहर कम से कम समय तक रखना है।

क्या है UR-HT तकनीक?

हेयर ट्रांसप्लांट में ग्राफ्ट को डोनर एरिया से निकालने के बाद रिसिपिएंट एरिया में प्रत्यारोपित किया जाता है। इस दौरान ग्राफ्ट कुछ समय तक शरीर के बाहर रहता है। डॉ. हरोर्स वेलनेस के मुताबिक, UR-HT तकनीक इसी एक्स्ट्रा-कॉर्पोरियल टाइम को कम करने पर केंद्रित है।

क्लीनिक के अनुसार, पारंपरिक वर्कफ्लो में एक्सट्रैक्शन और इंप्लांटेशन अलग-अलग चरणों में किए जा सकते हैं, जबकि UR-HT में दोनों प्रक्रियाओं को अधिक समन्वित और लगातार तरीके से करने का प्रयास किया जाता है।

इस व्यवस्था में एक ग्राफ्ट को एक्सट्रैक्ट करने के बाद उसे जल्द से जल्द इंप्लांट करने पर जोर दिया जाता है। क्लीनिक का कहना है कि इससे ग्राफ्ट के शरीर के बाहर रहने की अवधि कम हो सकती है।

ग्राफ्ट को डिहाइड्रेशन से बचाने पर जोर

हेयर ट्रांसप्लांट में ग्राफ्ट की गुणवत्ता और उसके सुरक्षित संरक्षण को महत्वपूर्ण माना जाता है। UR-HT प्रक्रिया में ग्राफ्ट के डिहाइड्रेशन और शरीर के बाहर रहने के दौरान होने वाले सेलुलर स्ट्रेस को कम करने के उद्देश्य से सर्जिकल वर्कफ्लो तैयार किया गया है।

डॉ. हरोर्स वेलनेस के अनुसार, एक्सट्रैक्शन और इंप्लांटेशन को टाइट और ओवरलैपिंग साइकल्स में व्यवस्थित करने से ग्राफ्ट को लंबे समय तक बाहर रखने की आवश्यकता कम हो सकती है।

क्लीनिक का दावा है कि इस प्रक्रिया से बेहतर ग्राफ्ट सर्वाइवल, अधिक हेयर डेंसिटी और अधिक समान कॉस्मेटिक परिणाम हासिल करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, 25-30% बेहतर परिणाम का आंकड़ा डॉ. हरोर्स वेलनेस द्वारा किया गया दावा है और इसे स्वतंत्र क्लिनिकल अध्ययन या किसी बाहरी वैज्ञानिक संस्था द्वारा सत्यापित परिणाम के रूप में इस रिपोर्ट में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है।

डॉ. नवनीत हरोर्स ने क्या कहा?

डॉ. हरोर्स वेलनेस के संस्थापक एवं निदेशक डॉ. नवनीत हरोर्स के अनुसार, हेयर ट्रांसप्लांट की सफलता केवल हेयरलाइन डिजाइन या ग्राफ्ट निकालने की प्रक्रिया पर निर्भर नहीं करती। ग्राफ्ट को शरीर से बाहर रखने के दौरान उसकी सुरक्षा भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उन्होंने कहा कि UR-HT तकनीक को इसी अवधि को कम करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। उनके मुताबिक, ग्राफ्ट को शरीर के बाहर कम समय तक रखने से उसके स्कैल्प में सफलतापूर्वक स्थापित होने की संभावना बेहतर हो सकती है।

डॉ. हरोर्स के अनुसार, UR-HT केवल किसी मौजूदा हेयर ट्रांसप्लांट तकनीक को नया नाम देने का प्रयास नहीं है, बल्कि इसमें सर्जिकल प्रक्रिया के क्रम और टीम वर्कफ्लो को पुनर्गठित करने पर जोर दिया गया है।

FUE, Sapphire FUE और DHT भी उपलब्ध

UR-HT के अलावा डॉ. हरोर्स वेलनेस में FUE, Sapphire FUE और DHT जैसी हेयर ट्रांसप्लांट प्रक्रियाएं भी उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है।

क्लीनिक के अनुसार, मरीज की स्थिति, डोनर एरिया, हेयर लॉस के पैटर्न और अपेक्षित परिणामों के आधार पर उपचार की प्रक्रिया तय की जाती है।

20 हजार से अधिक हेयर ट्रांसप्लांट का दावा

डॉ. हरोर्स वेलनेस के अनुसार, क्लीनिक ने पिछले एक दशक में 20,000 से अधिक हेयर ट्रांसप्लांट प्रक्रियाएं की हैं। क्लीनिक का दावा है कि उसका मरीज आधार 34 से अधिक देशों तक फैला हुआ है।

क्लीनिक के मुताबिक, उसके मरीजों में सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग और सेलिब्रिटीज भी शामिल रहे हैं। हालांकि, मरीजों की गोपनीयता को देखते हुए सभी मामलों की सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध होना जरूरी नहीं है।

भारत के बाद अंतरराष्ट्रीय विस्तार की तैयारी

UR-HT को अपनी प्रमुख स्वामित्व वाली तकनीक के रूप में आगे बढ़ाने के साथ डॉ. हरोर्स वेलनेस भारत में अपने विभिन्न केंद्रों के माध्यम से इसके विस्तार की योजना बना रहा है।

क्लीनिक की ओर से भारत के बाहर भी विस्तार की तैयारियों की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले समय में UR-HT हेयर ट्रांसप्लांट तकनीक को अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी पेश किए जाने की संभावना है।

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