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Cough syrup : छोटे गांवों में खांसी सीरप की बिक्री पर बैन

Ministry of Health and Family Welfare ने राजपत्र अधिसूचना जीएसआर 927 (ई) (Gazette Notification GSR 927 (E))  29 दिसंबर 2025 के माध्यम से औषधि नियम (Medicinal Rules), 1945 में संशोधन अधिसूचित किया है

Consumer Khabar: Ministry of Health and Family Welfare ने राजपत्र अधिसूचना जीएसआर 927 (ई) (Gazette Notification GSR 927 (E))  29 दिसंबर 2025 के माध्यम से औषधि नियम (Medicinal Rules), 1945 में संशोधन अधिसूचित किया है। यह भारत के राजपत्र असाधारण में भाग II, खंड 3, उप-खंड (i), 30 दिसंबर, 2025 को प्रकाशित हुआ था, जिसमें अनुसूची के, क्रमांक 13, प्रविष्टि 7 के अंतर्गत दवाओं का वर्ग शीर्षक से सीरप (Syrup) शब्द को हटा दिया गया है।

औषधि नियम, 1945 की अनुसूची ‘के’ औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 और उसके अंतर्गत निर्मित नियमों के कुछ प्रावधानों से विशिष्ट प्रकार की औषधियों को छूट प्रदान करती है। इस संशोधन से पूर्व, अनुसूची ‘के’ की प्रविष्टि संख्या 13 के अंतर्गत 1,000 से कम जनसंख्या वाले गांवों में खांसी की दवाइयों (Cough medicines) की बिक्री की अनुमति थी, जिसके लिए खुदरा बिक्री लाइसेंस संबंधी कुछ प्रावधानों का अनुपालन आवश्यक नहीं था।

खांसी की सीरप पर नहीं लागू होगी छूट 

उक्त प्रविष्टि से सीरप शब्द हटाए जाने के कारण, खांसी की दवाइयों के सीरप पर यह छूट लागू नहीं होगी। परिणामस्वरूप, छोटे गांवों में खांसी की दवाइयों के सीरप की बिक्री और वितरण अब केवल औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 और उसके अंतर्गत निर्मित नियमों के अनुसार विधिवत लाइसेंस प्राप्त फार्मेसियों (Pharmacies) के माध्यम से ही किया जाना अनिवार्य होगा।

Public Health की सुरक्षाओं देखते हुए उठाया कदम

सीरप बनाने की प्रक्रिया पर नियामक निगरानी को मजबूत करने और छूट के प्रारूप को समकालीन जन स्वास्थ्य एवं सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के लिए यह संशोधन किया गया है। आशा है कि इस उपाय से खांसी की दवाइयों के जिम्मेदार वितरण और बिक्री को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही पूरे देश में नियामक मानकों का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।

Medicine manufacturers, distributors, and sellers कड़ाई से करें नियम का पालन

खांसी की दवाइयों के निर्माताओं, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं को सलाह दी जाती है कि वे औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम, 1940 और औषधि नियम, 1945 के अंतर्गत लागू लाइसेंसिंग और नियामक आवश्यकताओं का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।

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