National Health Mission: गर्भवती महिलाओं की देखभाल, पोषण एवं कल्याण के लिए उठाए गए कदम
सरकार ने Pregnant women की देखभाल, पोषण एवं कल्याण को बढ़ावा देने, मातृ स्वास्थ्य परिणामों में सुधार लाने तथा पात्र लाभार्थियों तक समयबद्ध ढंग से लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से अनेक महत्वपूर्ण पहलें की हैं। National Health Mission (एनएचएम) के अंतर्गत भारत सरकार देशभर में गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाएं, पोषण संबंधी सहायता तथा कल्याणकारी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न योजनाओं एवं पहलों का क्रियान्वयन कर रही है। प्रमुख योजनाएं एवं पहलें निम्नलिखित हैं।
सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में गर्भवती महिलाओं को मुफ्त मिलती हैं प्रसव सेवाएं
Janani Shishu Suraksha Karyakram (जेएसएसके) के अंतर्गत सभी गर्भवती महिलाओं, जो सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव कराती हैं, को पूर्णतः निःशुल्क एवं बिना किसी व्यय के प्रसव सेवाएं, जिसमें Caesarean (शल्य) प्रसव भी शामिल है, उपलब्ध कराई जाती हैं। इस योजना के अंतर्गत निःशुल्क दवाएं, उपभोग्य सामग्री, अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान निःशुल्क आहार, निःशुल्क नैदानिक जांच, निःशुल्क परिवहन तथा आवश्यकता पड़ने पर निःशुल्क ब्लड ट्रांसफ्यूजन जैसी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। एक वर्ष तक की आयु के बीमार New borns के लिए भी इस प्रकार की निःशुल्क सुविधाएं उपलब्ध हैं।
Pradhan Mantri Surakshit Matritva Abhiyan (पीएमएसएमए) के अंतर्गत प्रत्येक माह की 9वीं तारीख को गर्भवती महिलाओं को विशेषज्ञ चिकित्सक/चिकित्सा अधिकारी द्वारा निःशुल्क, सुनिश्चित एवं गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व जांच उपलब्ध कराई जाती है।
उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की व्यक्तिगत की जाती है निगरानी
विस्तारित प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं, विशेषकर उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं (एचआरपी) को गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व देखभाल (एएनसी) उपलब्ध कराई जाती है। इसके अंतर्गत सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित होने तक प्रत्येक उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला की व्यक्तिगत निगरानी की जाती है। साथ ही, चिन्हित उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं तथा उनके साथ जाने वाली मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (ASHA) को पीएमएसएमए के नियमित दौरे के अतिरिक्त तीन अतिरिक्त भ्रमणों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन भी प्रदान किया जाता है।
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जच्चा-बच्चा की सुरक्षा की मिलती है गारंटी
Safe Motherhood Assurance (सुमन) के तहत प्रत्येक गर्भवती महिला एवं नवजात, जो सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाएं प्राप्त करने आते हैं, उन्हें निःशुल्क, सुनिश्चित, सम्मानजनक एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इस पहल के अंतर्गत सेवाओं से इनकार के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई गई है, ताकि सभी मातृ एवं नवजात शिशु मृत्यु को रोका जा सके।
आशा वर्कर्स की निगरानी में रहती हैं गर्भवती महिलाएं
प्रसवोत्तर देखभाल का सुदृढ़ीकरण का उद्देश्य प्रसवोत्तर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना है। इसके अंतर्गत माताओं में खतरे के संकेतों की समय पर पहचान पर विशेष बल दिया जाता है तथा ASHA workers को उच्च जोखिम वाली प्रसवोत्तर माताओं की शीघ्र पहचान, समय पर रेफरल एवं उपचार सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।
संतान के जन्म पर 5000 रुपए की दी जाती है नगद प्रोत्साहन राशि
Pradhan Mantri Matru Vandana Yojana (पीएमएमवीवाई) एक केन्द्र प्रायोजित मातृत्व लाभ योजना है, जिसके अंतर्गत पहली संतान के जन्म पर पात्र लाभार्थी के बैंक अथवा डाकघर खाते में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से 5,000 रुपये की नकद प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। संस्थागत प्रसव के बाद लाभार्थी को जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) के अंतर्गत स्वीकृत मानकों के अनुसार शेष मातृत्व लाभ भी प्रदान किया जाता है, जिससे औसतन एक महिला को 6,000 रुपये की सहायता प्राप्त होती है। इसके अतिरिक्त, दूसरी संतान के रूप में बालिका के जन्म पर पात्र लाभार्थियों को पीएमएमवीवाई के अंतर्गत 6,000 रुपये की नकद प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाती है।
आंगनवाड़ी के माध्यम से पूरक पोषण उपलब्ध कराया जाता है
Mission Saksham Anganwadi and Poshan 2.0 के माध्यम से कुपोषण की चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने आंगनवाड़ी सेवाएं, पोषण अभियान तथा किशोरी बालिका योजना (आकांक्षी जिलों एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र में 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग की किशोरियों के लिए) को एकीकृत कर मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 (मिशन पोषण 2.0) के अंतर्गत समाहित किया है।
मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0 के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं, 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों तथा किशोरी बालिकाओं को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून (एनएफएसए), 2013 की अनुसूची-II में निर्धारित पोषण मानकों के अनुसार पूरक पोषण उपलब्ध कराया जाता है। जनवरी 2023 में इन पोषण मानकों को संशोधित किया गया, ताकि आहार में विविधता, गुणवत्तापूर्ण प्रोटीन, स्वास्थ्यवर्धक वसा तथा आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों पर आधारित अधिक व्यापक एवं संतुलित पूरक पोषण पैकेज उपलब्ध कराया जा सके। इसमें कैल्शियम, जिंक, आयरन, आहार फोलेट, विटामिन-ए, विटामिन-बी6 तथा विटामिन-बी12 जैसे आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानूनि, 2013 के प्रावधानों के अनुसार गंभीर तीव्र कुपोषण से पीड़ित बच्चों को भी अतिरिक्त पूरक पोषण उपलब्ध कराया जाता है।
Suman Roadmap-2030
सुमन रोडमैप-2030 मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य के लिए जीवन-चक्र आधारित दृष्टिकोण को अपनाता है। इसके अंतर्गत गर्भधारण-पूर्व देखभाल, प्रसवपूर्व देखभाल, प्रसवकालीन देखभाल तथा प्रसवोत्तर देखभाल सहित संपूर्ण देखभाल श्रृंखला में विभिन्न हस्तक्षेपों को जोड़ा गया है।
Anemia-Free India अभियान
सरकार ने 29 जून 2026 को आयोजित केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद (सीसीएचएफडब्ल्यू) की 16वीं बैठक के दौरान एनीमिया मुक्त भारत अभियान के संचालन संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए। इनका उद्देश्य 7×7×7 रणनीति के माध्यम से एनीमिया की उच्च व्यापकता को कम करना है, जो पूर्व में लागू 6×6×6 रणनीति का उन्नत स्वरूप है। इस 7×7×7 रणनीति के अंतर्गत जीवन-चक्र आधारित दृष्टिकोण अपनाते हुए सात लाभार्थी समूहों को शामिल किया गया है, जिनमें कम जन्म वजन वाले शिशु (0–6 माह), 6–59 माह तक के बच्चे, 5–9 वर्ष आयु वर्ग के बच्चे, 10–19 वर्ष आयु वर्ग के किशोर एवं किशोरियां, गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं तथा 20–49 वर्ष आयु वर्ग की प्रजनन आयु की महिलाएं शामिल हैं।
उपरोक्त पहलों के अतिरिक्त, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत सरकार एक सुदृढ़ एवं बहु-स्तरीय निगरानी तंत्र के माध्यम से देशभर में पात्र गर्भवती महिलाओं को लाभों का पारदर्शी, प्रभावी एवं समयबद्ध वितरण सुनिश्चित कर रही है। इसके अंतर्गत सभी राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के साथ आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम समन्वय समिति (एनपीसीसी) की बैठकों में स्वीकृत लक्ष्यों के सापेक्ष राज्यवार प्रमुख उपलब्धियों की समीक्षा की जाती है तथा आउटपुट-आउटकम मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क (ओओएमएफ) के माध्यम से योजनाओं के प्रदर्शन का नियमित मूल्यांकन किया जाता है। इसके अतिरिक्त, वार्षिक कॉमन रिव्यू मिशन (सीआरएम) के माध्यम से कार्यक्रमों के क्रियान्वयन, स्वास्थ्य प्रणाली के सुदृढ़ीकरण तथा प्रमुख स्वास्थ्य संकेतकों पर हुई प्रगति का स्वतंत्र एवं जमीनी स्तर पर आकलन किया जाता है। इन कार्यक्रमों के क्रियान्वयन एवं निगरानी व्यवस्थाओं के साथ-साथ सरकार ने जन-जागरूकता बढ़ाने, सामुदायिक पहुंच को सुदृढ़ करने तथा प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए भी अनेक कदम उठाए हैं, ताकि मातृ स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी सेवाओं का प्रभावी लाभ लक्षित लाभार्थियों तक पहुंच सके।
विभिन्न योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) तथा व्यवहार परिवर्तन संचार (बीसीसी) रणनीतियों के माध्यम से, जिसमें जनसंचार माध्यम भी शामिल हैं, नियमित रूप से किया जाता है। साथ ही, सहायक नर्स एवं प्रसूति सेविका (एएनएम), मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा) तथा सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) जैसे क्षेत्रीय स्तर के स्वास्थ्य कर्मी व्यक्तिगत संवाद के माध्यम से जमीनी स्तर पर इन कार्यक्रमों का व्यापक प्रचार-प्रसार एवं प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कर रहे हैं।
पोषण अभियान के अंतर्गत निम्नलिखित उपाय किए जा रहे हैं
- पोषण ट्रैकर को एक डिजिटल सुशासन उपकरण के रूप में लागू किया गया है, ताकि लाभार्थियों तथा आंगनवाड़ी सेवाओं की वास्तविक समय में निगरानी एवं ट्रैकिंग सुनिश्चित की जा सके।
- पोषण ट्रैकर में ‘नॉमिनी मॉड्यूल’ की शुरुआत की गई है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि यदि पंजीकृत लाभार्थी स्वयं टेक-होम राशन प्राप्त करने में असमर्थ हो, तो उसके नामित व्यक्ति के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं एवं किशोरी बालिकाओं को राशन का निर्बाध वितरण जारी रहे।
- पोषण ट्रैकर एप्लीकेशन के प्रभावी उपयोग के लिए सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं तथा अन्य क्षेत्रीय कर्मियों को स्मार्टफोन उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही, उनके लिए वार्षिक डेटा रिचार्ज सहायता भी प्रदान की जा रही है।
यह जानकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
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(फोटो साभार-सोशल मीडिया)



