चार किलोमीटर में चार स्पीड लिमिट, असमंजस में वाहन चालक
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे ने राजधानी से देहरादून का सफर जरूर तेज और आसान बना दिया है, लेकिन इस एक्सप्रेस-वे पर महज चार किलोमीटर के दायरे में अलग-अलग प्रकार के स्पीड लिमिट के साइन बोर्डों ने...

Consumer Khabar: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे ने राजधानी से देहरादून का सफर जरूर तेज और आसान बना दिया है, लेकिन इस एक्सप्रेस-वे पर महज चार किलोमीटर के दायरे में अलग-अलग प्रकार के स्पीड लिमिट के साइन बोर्डों ने लोगों के मन में असमंजस पैदा कर दिया है। इसमें गीता कॉलोनी के पास एक तय स्पीड लिमिट का साइन बोर्ड लगा है, तो गांधी नगर मार्केट पर दूसरी नई स्पीड लिमिट का बोर्ड लगा है। इतना ही नहीं, कुछ दूर चलने पर कश्मीरी गेट फ्लाईओवर के पास तीसरा और भजनपुरा की ओर चलने पर शास्त्री पार्क-उस्मानपुर के पास लगे साइन बोर्ड पर बिल्कुल अलग रफ्तार दिखाई देती है। सिविक एजेंसियों की इस लापरवाही ने एक्सप्रेस-वे को और ज्यादा खतरनाक बना दिया है। ऐसे में अब वाहन चालकों को समझ नहीं आ रहा है कि एक्सप्रेस-वे पर चलने के लिए सही स्पीड लिमिट क्या है? यह असमंजस दुर्घटनाओं को बढ़ावा दे रहा है।
दरअसल, दिल्ली से राज्य के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने के लिए कई हाईवे और एक्सप्रेस-वे बनाए गए हैं, जिनका इस्तेमाल लोग अपने गंतव्य तक तेजी से पहुंचने के लिए करते हैं। इन हाई-स्पीड कॉरिडोर पर गाड़ियां अक्सर 100 किमी/घंटा से ज्यादा रफ्तार में दौड़ती हैं, लेकिन यही तेजी कई बार जानलेवा साबित होती है और आए दिन सड़क हादसों में लोगों की जान चली जाती है। इसी कड़ी में दिल्ली से देहरादून का सफर आसान बनाने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्घाटन के बाद पूरी तरह शुरू हो गया। लेकिन शुरुआत के साथ ही सिविक एजेंसियों की लापरवाही सामने आ गई है, जो लोगों की सुरक्षा पर भारी पड़ सकती है। दरअसल, इस हाई-स्पीड कॉरिडोर पर महज चार किलोमीटर के दायरे में अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग स्पीड लिमिट के साइन बोर्ड लगाए गए हैं। इनमें एक बोर्ड पर अलग स्पीड दर्ज है, तो कुछ दूरी चलने पर दूसरे बोर्ड पर बिल्कुल अलग रफ्तार का साइन बोर्ड लगा है। ऐसे में अलग-अलग प्रकार की स्पीड के साइन बोर्ड होने की वजह से वाहन चालकों में भारी भ्रम की स्थिति बन गई है।
साइन बोर्डों पर अलग-अलग स्पीड का खेल
दरअसल, गीता कॉलोनी से भजनपुरा की ओर जाते समय एक्सप्रेस-वे की शुरुआत में कारों के लिए 100 किमी/घंटा और भारी वाहनों के लिए 80 किमी/घंटा की स्पीड के साइन बोर्ड लगा दिखाई देता हैं। लेकिन कुछ दूर आगे बढ़ने पर गांधी नगर मार्केट के पास सड़क पर ही पीले और सफेद रंग से यही लिमिट 70 और 60 किमी/घंटा की स्पीड में सड़क पर पेंट करी हुई दिखाई देती है। यहीं नहीं, कश्मीरी गेट की ओर जाने वाले फ्लाईओवर के पास लगे साइन बोर्डों पर यही स्पीड बदलकर 85 और 65 किमी/घंटा हो जाती है। जबकि भजनपुरा की ओर बढ़ते ही शास्त्री पार्क-उस्मानपुर के पास कारों के लिए 80 किमी/घंटा और भारी वाहनों के लिए 60 किमी/घंटा की स्पीड लिमिट का बोर्ड दिखाई देता है। महज कुछ किलोमीटर के भीतर बार-बार बदलती ये स्पीड लिमिट वाहन चालकों के लिए बड़ी उलझन बन गई है, जो न सिर्फ ड्राइविंग को मुश्किल बना रही है, बल्कि हादसों के खतरे को भी बढ़ा रही है।
दिल्ली सरकार के नोटिफिकेशन के आधार पर स्पीड लिमिट के लिए एनएचएआई को पत्र लिखा है। इसके अलावा एक्सप्रेस-वे पर अलग-अलग स्पीड लिमिट के जितने भी साइन बोर्ड लगे हैं, उनको हटाने के लिए भी जल्द ही पत्र लिखूंगा।
– के. रमेश, डीसीपी, ईस्टर्न रेंज ट्रैफिक




