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नीचे पुराने पिलरों पर खड़ी कर दी चार मंजिला इमारत, बना बड़े हादसे का कारण

साकेत, सैदुल्लाजाबाद इलाके में छह लोगों की मौत का कारण बनी चार मंजिला अवैध इमारत की जांच के दौरान चौकाने वाला खुलासा हुआ है। एनडीआरएफ के विशेषज्ञों ने की माने तो इमारत के गिरने का मुख्य कारण नीचे की तरफ पिलर का फटना था...

Consumer Khabar: साकेत, सैदुल्लाजाबाद इलाके में छह लोगों की मौत का कारण बनी चार मंजिला अवैध इमारत की जांच के दौरान चौकाने वाला खुलासा हुआ है। एनडीआरएफ के विशेषज्ञों ने की माने तो इमारत के गिरने का मुख्य कारण नीचे की तरफ पिलर का फटना था। बेसमेंट और पहली मंजिल के पिलर काफी पुराने थे। नीचे की पुरानी इमारत के ऊपर ही पहले तीन मंजिला नया कंट्रक्शन किया गया। तब इमारत को मजबूत रखने के लिए पुराने पिलर को मजबूत नहीं किया गया। अब फिर करीब डेढ़ महीने से इमारत के ऊपर दो नए फ्लोर तैयार किए जा रहे थे। यह दोनों फ्लोर नियम कानूनों को ताक पर रखकर अवैध रूप से बनाए जा रहे थे। पहला लिंटर डल चुका था और दीवारें खड़ी होने के बाद दूसरे की तैयारी चल रही थी। नीचे पुराने पिलरों पर इमारत का वजन इतना बढ़ गया कि वह फट गए और पूरी इमारत भरभरा कर ढह गई। स्थानीय लोगों ने बताया कि सैदुलाजाब में जो इमारत गिरी है वह करीब 400 गज में बनी हुई थी। इमारत में कोचिंग, पीजी, आफिस, कैफे और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं। शाम के समय ऑफिस बंद हो गया था। वीकेंड व शाम का वक्त होने की वजह से ज्यादातर लोग बाहर गए हुए थे। अन्यथा हादसा और भी ज्यादा जानलेवा हो सकता था।

जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
उधर, डीसीपी (साउथ) अनंत मित्तल ने बताया कि हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। घटनास्थल से पुलिस टीम ने एफएसएल की मदद से साक्ष्य एकत्र किए हैं। पुलिस सूत्रों की माने तो पुलिस ने मकान मालिक, बिल्डर और ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। मामले में अभी किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। आसपास लोगों से पूछताछ में पता चला है कि निर्माणाधीन इमारत किसी कर्मवीर जेलदार की थी। वह बिल्डर मनीष खत्री के माध्यम से ठेकेदार सिराज के माध्यम से पुरानी इमारत पर दो और मंजिल तैयार करा रहा था। फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है।

छह घंटे तक मांगती रही मदद, फिर खामोश हो गई आवाज
शनिवार की शाम हुए हादसे के बाद से ही बचाव कार्य तो शुरू कर दिया गया था, लेकिन वहां बड़ी क्रेन नहीं बुलाई गई थी। जिसके चलते बचाव कार्य की गति धीमी रही। रविवार दोपहर 12 बजे दो बड़ी क्रेन मंगवाई गई। जिससे बचाव कार्य में तेजी आई। मृतक पार्वती की बेटी नीलम ने बताया कि रात करीब दो बजे तक मलबे से उसकी मदद की आवाज आ रही थी, वह मदद मांग रही थी। बाद में उसकी आवाज खामोश हो गई। लेकिन पर्याप्त संसाधन नहीं होने के चलते मलबा हटाने में परेशानी आ रही थी। जिसके चलते उसकी मां को नहीं निकाला जा सका। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अगर बड़ी क्रेन पहले आ जाती तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

एनडीआरएफ पर आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि एनडीआरएफ का बचाव अभियान बहुत धीमा था और उनके पास जरूरी उपकरणों की भी कमी थी। उनके पास सिर्फ एक गैस कटर था। मलबे के नीचे कोई जिंदा बचा है या नहीं, कोई मर भी गया है तो वह कहां और किस कोने में मलबे के नीचे दबा है, यह पता लगाने के लिए शुरू में एनडीआरएफ के पास कोई स्कैनर भी नहीं था। अगर स्कैनर व डिटेक्टर होते तो उनकी मदद से सही जगह से मलबा हटाकर पहले उन्हें बाहर निकालकर बचाया जा सकता था।

24 घंटे बाद भी स्थिति साफ नहीं 
सैदुल्लजाबाद में शनिवार शाम गिरी इमारत पर रविवार शाम तक मलबे से 13 लोगों को निकाला गया। हादसे में छह लोगों की मौत हो गई। हादसे को 24 घंटे से ज्यादा समय हो गया है, लेकिन विभिन्न एजेंसियों अभी भी बचाव कार्य में जुटी हैं। खबर लिखे जाने तक मलबा पूरी तरह नहीं हटाया जा सका था। जिसके चलते अभी स्थिति साफ नहीं है कि इमारत के नीचे कोई दबा है या नहीं। एनडीआरएफ के सूत्रों ने बताया कि मौके पर मलबे के बीच जिंदगी की तलाश के लिए मशीनों और डॉग स्क्वायड का का इस्तेमाल किया जा रहा है। मगर समय बीतने के साथ मलबे के नीचे लोगों के जिंदा बचे होने की उम्मीद कम होती जा रही है। सूत्रों ने बताया कि मलबा करीब तीन हजार स्क्वायर फीट में पड़ा हुआ है, मलबे को हटाने में सोमवार शाम तक का समय लग सकता है।

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