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Delhi Riots: फांसी या उम्रकैद, ताहिर हुसैन की सजा पर फैसला आज

साल 2020 के दिल्ली दंगों (Delhi riots) के दौरान हुए आईबी अधिकारी अंकित शर्मा (Ankit Sharma) की जघन्य हत्या के मामले में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट (Karkardooma Court) आज फैसला सुनाएगा...

Consumer khabar: साल 2020 के दिल्ली दंगों (Delhi riots) के दौरान हुए आईबी अधिकारी अंकित शर्मा (Ankit Sharma) की जघन्य हत्या के मामले में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट (Karkardooma Court) आज फैसला सुनाएगा। इससे पहले कोर्ट ने इस मामले में आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन सहित पांच लोगों को दोषी ठहराय था। कोर्ट ने ताहिर हुसैन को हत्या, अपहरण और दंगा भड़काने का दोषी करार दे दिया था। अब बड़ा सवाल ये है कि आखिर ताहिर हुसैन को किन धाराओं में दोषी ठहराया गया है और उन धाराओं में ताहिर को अधिकतम और न्‍यूनतम कितनी सजा हो सकती है।

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हालांकि कोर्ट ने ताहिर हुसैन को आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक साजिश) के आरोप से बरी कर दिया है लेकिन मुख्य अपराध यानी धारा 302 (हत्या) और धारा 365 (अपहरण) में दोषी ठहराया है। कानून के जानकारों के मुताबिक जब किसी मामले में धारा 302 के तहत दोष सिद्ध हो जाता है, तो कोर्ट बाकी छोटी सजाओं को उसी के साथ समानांतर चलाने का आदेश देती है। धारा 302 के तहत अपराध सिद्ध होने पर कोर्ट के पास केवल दो ही विकल्प बचते हैं आजीवन कारावास (life imprisonment) या मृत्युदंड (Capital punishment) या फांसी की सजा। चूंकि इस मामले में क्रूरता की हदें पार की गई थीं और आईबी अफसर के शरीर पर धारदार हथियारों के अनगिनत घाव मिले थे, इसलिए अभियोजन पक्ष इसे दुर्लभ से दुर्लभतम मामला बताकर फांसी की मांग कर सकता है। कोर्ट ने ताहिर को धारा 120बी (आपराधिक साजिश) के आरोप से बरी कर दिया है, जिससे साफ है कि सीधे हत्या और मौके पर दंगे व अपहरण की धाराओं (147, 148, 149, 153A, 365) के आधार पर ही सजा तय होगी। ऐसे में अगर कोर्ट फांसी (Court ordered hanging) की सजा नहीं सुनाती है तो भी ताहिर हुसैन का पूरी जिंदगी सलाखों के पीछे कटना बिल्कुल तय माना जा रहा है।

Tahir Hussain की इन धाराओं के तहत ठहराया गया है दोषी
आईपीसी की धारा 302 (हत्या)

कोर्ट ने ताहिर हुसैन को हत्या को दोषी करार दिया है। काननू की नजर में यह सबसे गंभीर अपराधों में से एक है। इस धारा के तहत दोषी को मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा दी जा सकती है। साथ ही उस पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

आईपीसी की धारा 365 (अपहरण)

किसी व्यक्ति का गुप्त और अवैध रूप से अपहरण या बंधक बनाने के लिए इसमें अधिकतम सात साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है।

आईपीसी की धारा 153ए (विभिन्न समूहों के बीच नफरत फैलाना)

धर्म, जाति या भाषा के आधार पर नफरत फैलाने के इस अपराध में अधिकतम 3 साल तक की जेल या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।

आईपीसी की धारा 148 (घातक हथियार के साथ दंगा करना)

हथियारों से लैस होकर दंगा करने की स्थिति में अधिकतम 3 साल तक की कैद या जुर्माना हो सकता है।

आईपीसी की धारा 147 (दंगा करना)

साधारण दंगे के मामले में दोषी पाए जाने पर अधिकतम 2 साल तक की जेल या जुर्माना हो सकता है।

आईपीसी की धारा 188 (सरकारी आदेश की अवज्ञा)

लोक सेवक द्वारा जारी आदेश का उल्लंघन करने पर एक महीने से छह महीने तक की कैद या जुर्माना हो सकता है।

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(फोटो साभार-सोशल मीडिया)

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