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Scheme for the Development of Art and Culture: पात्र लाभार्थियों को जारी की जाती है धनराशि

संस्कृति मंत्रालय, कला संस्कृति विकास योजना (KSVY) का कार्यान्वयन करता है, जिसके अंतर्गत Assam and Himachal प्रदेश राज्यों सहित पूरे देश में प्रदर्शन कलाओं में लगे पात्र सांस्कृतिक संगठनों और व्यक्तिगत कलाकारों, जिनमें Tribal and rural artists शामिल हैं, को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

Consumer khabar: संस्कृति मंत्रालय, कला संस्कृति विकास योजना (KSVY) का कार्यान्वयन करता है, जिसके अंतर्गत Assam and Himachal प्रदेश राज्यों सहित पूरे देश में प्रदर्शन कलाओं में लगे पात्र सांस्कृतिक संगठनों और व्यक्तिगत कलाकारों, जिनमें Tribal and rural artists शामिल हैं, को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

इस केंद्रीय क्षेत्र योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को भारत की संचित निधि से केएसवीवाई के अंतर्गत Allocated annual budget के माध्यम से धनराशि जारी की जाती है। केएसवीवाई के अंतर्गत विभिन्न योजना घटकों का संक्षिप्त विवरण अनुलग्नक-I (Annexure-I) में दिया गया है।

केएसवीवाई के तहत जिलावार, श्रेणीवार और निर्वाचन क्षेत्रवार आंकड़े नहीं रखे जाते हैं। हालांकि, पिछले पांच वर्षों और वर्तमान वित्तीय वर्ष के दौरान असम और हिमाचल प्रदेश सहित पूरे देश में कलाकारों, सांस्कृतिक संगठनों (दक्षिण कन्नड़ में यक्षगान समूहों सहित, और जनजातीय समूहों सहित प्रदर्शन कला समूहों) को स्वीकृत परियोजनाओं और प्रदान की गई वित्तीय सहायता का विवरण, साथ ही लाभार्थियों की संख्या, अनुलग्नक-II में दी गई है ।

सरकार, कला संस्कृति विकास योजना (केएसवीवाई) के माध्यम से आदिवासी कला, लोक परंपराओं, संगीत, नृत्य, सांस्कृतिक उत्सवों और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देती है और उनका संरक्षण करती है। इसके अलावा, देश भर में लोक/आदिवासी कला और संस्कृति के विभिन्न रूपों की रक्षा, संवर्धन और संरक्षण के लिए, भारत सरकार ने पटियाला, नागपुर, उदयपुर, प्रयागराज, कोलकाता, दीमापुर और तंजावुर में मुख्यालयों के साथ सात क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों (जेडसीसी) की स्थापना की है। ये केन्द्र पूरे देश में नियमित रूप से विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों और कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं, जिसके लिए उन्हें वार्षिक अनुदान दिया जाता है।

संस्कृति मंत्रालय, सांस्कृतिक विरासत संरक्षण (Ministry of Culture, Cultural Heritage Conservation) को बढ़ावा देने और उभरते कलाकारों तथा पारंपरिक प्रदर्शन समूहों की भागीदारी बढ़ाने के लिए, समाचार पत्रों में विज्ञापन, मंत्रालय की वेबसाइट, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, क्षेत्रीय संस्कृति केंद्रों और अकादमियों के माध्यम से अपनी योजनाओं से संबंधित जानकारी प्रसारित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। इस संबंध में, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान विभिन्न योजना घटकों के अंतर्गत स्वीकृत, अस्वीकृत और लंबित आवेदनों की संख्या का विवरण अनुलग्नक-III में दिया गया है।

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संस्कृति मंत्रालय ने सांस्कृतिक और रचनात्मक अर्थव्यवस्था के प्रचार और विकास के लिए ‘रचनात्मक भारत’ पहल तैयार की है। इसमें उभरते कलाकारों और रचनात्मक पेशेवरों के लिए समर्थन सहित रचनात्मक अर्थव्यवस्था के सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए क्षमता निर्माण, बाजार पहुंच, नवाचार, डिजिटल सशक्तिकरण और संस्थागत सुदृढ़ीकरण के लिए समर्थन की परिकल्पना की गई है।

मंत्रालय अपने क्षेत्रीय संस्कृति केंद्रों और अकादमियों के माध्यम से उभरते कलाकारों को विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, उत्सवों, कार्यशालाओं और प्रदर्शनियों में शामिल करके उन्हें एक मंच प्रदान करता है। ये कार्यक्रम सदस्य राज्यों में आयोजित किए जाते हैं, जहां कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, व्यापक पहचान हासिल करने और पारंपरिक कला रूपों को संरक्षित एवं बढ़ावा देने का अवसर मिलता है। कलाकारों को मानदेय, यात्रा भत्ता/दैनिक भत्ता, आवास और भोजन, स्थानीय परिवहन आदि भी प्रदान किए जाते हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि होती है और उन्हें कला को एक स्थायी आजीविका के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलता है। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

गुरु-शिष्य परंपरा को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता (रेपर्टरी अनुदान)

इस योजना का उद्देश्य नाट्य मंडलियों, रंगमंच समूहों, संगीत मंडलियों, बाल रंगमंच आदि प्रदर्शन कला गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना और गुरु-शिष्य परंपरा के अनुरूप कलाकारों को उनके संबंधित गुरु द्वारा नियमित रूप से प्रशिक्षण देना है। योजना के अनुसार, रंगमंच, संगीत और नृत्य के क्षेत्र में एक गुरु और अधिकतम 18 शिष्यों को सहायता प्रदान की जाती है। गुरु के लिए सहायता राशि 15000 रुपये प्रति माह है और शिष्य के लिए कलाकार की आयु के आधार पर 2000-10000 रुपये प्रति माह है।

कला और संस्कृति के संवर्धन हेतु वित्तीय सहायता: इस योजना के निम्नलिखित उप-घटक हैं

राष्ट्रीय स्तर के सांस्कृतिक संगठनों को वित्तीय सहायता

इस योजना का उद्देश्य देश भर में कला और संस्कृति को बढ़ावा देने वाले राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय सांस्कृतिक संगठनों को प्रोत्साहित करना और उनका समर्थन करना है। यह अनुदान उन संगठनों को दिया जाता है जिनका विधिवत गठित प्रबंध निकाय भारत में पंजीकृत हो; जिनका अखिल भारतीय स्वरूप और राष्ट्रीय स्तर पर संचालन होता हो; जिनमें पर्याप्त कार्यबल हो; और जिन्होंने पिछले 5 वर्षों में से 3 वर्षों के दौरान सांस्कृतिक गतिविधियों पर एक करोड़ रुपये या उससे अधिक खर्च किए हों। इस योजना के अंतर्गत अनुदान राशि एक करोड़ रुपये है, जिसे विशेष परिस्थितियों में 5 करोड़ रुपये तक बढ़ाया जा सकता है।

सांस्कृतिक कार्य और उत्पादन अनुदान (सीएफपीजी)

इस योजना के एक घटक का उद्देश्य गैर-सरकारी संगठनों/सोसायटी/ट्रस्ट/विश्वविद्यालयों आदि को सेमिनार, सम्मेलन, अनुसंधान, कार्यशालाओं, उत्सवों, प्रदर्शनियों, संगोष्ठियों, नृत्य, नाटक-नाट्यकला, संगीत आदि के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत अनुदान की राशि प्रति संगठन 5 लाख रुपये है, जिसे असाधारण परिस्थितियों में 20 लाख रुपये तक बढ़ाया जा सकता है।

हिमालय की सांस्कृतिक विरासत के Conservation and Development के लिए वित्तीय सहायता

इस योजना के घटक का उद्देश्य अनुसंधान, प्रशिक्षण और दृश्य-श्रव्य कार्यक्रमों के माध्यम से प्रसार द्वारा हिमालय की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना और संरक्षित करना है। यह वित्तीय सहायता हिमालयी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले राज्यों – जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में स्थित संगठनों को प्रदान की जाती है। अनुदान राशि प्रति वर्ष 10 लाख रुपये है, जिसे असाधारण परिस्थितियों में 30 लाख रुपये तक बढ़ाया जा सकता है।

बौद्ध/तिब्बती संगठनों के संरक्षण एवं विकास के लिए वित्तीय सहायता

इस योजना के अंतर्गत बौद्ध/तिब्बती संस्कृति और परंपराओं के प्रचार-प्रसार, वैज्ञानिक विकास और संबंधित क्षेत्रों में अनुसंधान में संलग्न स्वैच्छिक बौद्ध/तिब्बती संगठनों, जिनमें मठ भी शामिल हैं, को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। योजना के अंतर्गत प्रति संगठन प्रति वर्ष 30 लाख रुपये की निधि दी जाती है, जिसे विशेष परिस्थितियों में एक करोड़ रुपये तक बढ़ाया जा सकता है।

Studio Theatre सहित भवन निर्माण के लिए वित्तीय सहायता

इस योजना के अंतर्गत गैर-सरकारी संगठनों, ट्रस्टों, समितियों, सरकारी संस्थाओं, विश्वविद्यालयों, कॉलेजों आदि को सांस्कृतिक अवसंरचना (स्टूडियो थिएटर, सभागार, रिहर्सल हॉल, कक्षा आदि) के निर्माण और विद्युत, वातानुकूलन, ध्वनि-रोधक, प्रकाश और ध्वनि आदि सुविधाओं के प्रावधान के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। इस योजना के अंतर्गत महानगरों में अधिकतम अनुदान राशि 50 लाख रुपये तक और गैर-महानगरों में 25 लाख रुपये तक है।

घरेलू त्यौहार और मेले

इस योजना का उद्देश्य संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित ‘राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सवों’ के आयोजन में सहायता प्रदान करना है। राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव National Cultural Festival (आरएसएम) क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों (जेडसीसी) के माध्यम से आयोजित किए जाते हैं, जहां देश भर से बड़ी संख्या में कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हैं। संस्कृति मंत्रालय द्वारा नवंबर 2015 से अब तक देश में चौदह राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव आयोजित किए जा चुके हैं।

टैगोर सांस्कृतिक परिसरों (TCC) के निर्माण के लिए वित्तीय सहायता

इस योजना के अंतर्गत गैर-सरकारी संगठनों, ट्रस्टों, सोसाइटियों, सरकारी संस्थाओं, राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकार, विश्वविद्यालयों, केंद्रीय/राज्य सरकारी एजेंसियों/निकायों, नगर निगमों, प्रतिष्ठित गैर-लाभकारी संगठनों आदि को वित्तीय सहायता प्रदान करना है ताकि वे नए बड़े सांस्कृतिक स्थल जैसे सभागार का निर्माण कर सकें। इनमें मंच प्रदर्शन (नृत्य, नाटक और संगीत), प्रदर्शनियों, सेमिनारों, साहित्यिक गतिविधियों, ग्रीन रूम आदि के लिए सुविधाएं और बुनियादी ढांचा शामिल है। योजना के अंतर्गत मौजूदा सांस्कृतिक सुविधाओं (रवींद्र भवन, रंगशाला) आदि के जीर्णोद्धार, नवीनीकरण, विस्तार, उन्नयन और आधुनिकीकरण के लिए भी सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के अंतर्गत किसी भी परियोजना के लिए वित्तीय सहायता सामान्यतः अधिकतम 15 करोड़ रुपये तक होगी। केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत परियोजना लागत का 90 प्रतिशत और शेष 10 प्रतिशत सरकारी सहायता के अंतर्गत होगा।

राष्ट्रीय विकास परियोजनाओं के लिए प्राप्तकर्ता राज्य सरकार/गैर-सरकारी संगठनों या संबंधित संगठन द्वारा वहन किया जाता है और राष्ट्रीय विकास परियोजनाओं के अलावा, केंद्रीय सहायता और राज्य के हिस्से के लिए 60:40 का अनुपात है।

कला एवं संस्कृति के संवर्धन हेतु छात्रवृत्ति एवं फेलोशिप योजना: इस योजना में निम्नलिखित तीन घटक शामिल हैं

संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट व्यक्तियों को फेलोशिप प्रदान करने की योजना

एक वर्ष में 25 से 40 वर्ष (जूनियर) और 40 वर्ष से अधिक (सीनियर) आयु वर्ग के उत्कृष्ट व्यक्तियों को विभिन्न सांस्कृतिक क्षेत्रों में क्रमशः 10,000/- रुपये प्रति माह और 20,000/- रुपये प्रति माह की 400 फेलोशिप (200 जूनियर और 200 सीनियर) प्रदान की जाती हैं। यह सांस्कृतिक अनुसंधान के लिए 2 वर्ष की अवधि के लिए होती हैं। फेलोशिप का भुगतान चार समान किस्तों में किया जाता है, प्रत्येक किस्त छह महीने की होती है।

विभिन्न सांस्कृतिक क्षेत्रों में युवा कलाकारों के लिए छात्रवृत्ति योजना

एक बैच में अधिकतम 400 छात्रवृत्तियां प्रदान की जाती हैं। इस योजना के अंतर्गत 18-25 वर्ष आयु वर्ग के प्रतिभाशाली युवा कलाकारों को भारत में भारतीय शास्त्रीय संगीत, भारतीय शास्त्रीय नृत्य, रंगमंच, मूक अभिनय, दृश्य कला, लोक कला, पारंपरिक और स्वदेशी कलाएं तथा अर्ध शास्त्रीय संगीत आदि में उच्च प्रशिक्षण के लिए 5,000 रुपये प्रति माह की वित्तीय सहायता दो वर्षों के लिए दी जाती है। छात्रवृत्ति की राशि चार समान किस्तों में, छह-छह माह की अवधि के लिए जारी की जाती है।

टैगोर राष्ट्रीय सांस्कृतिक अनुसंधान फैलोशिप

इस योजना का उद्देश्य संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत विभिन्न संस्थानों और देश के अन्य चिन्हित सांस्कृतिक संस्थानों को सशक्त और पुनर्जीवित करना है, ताकि विद्वानों/शिक्षाविदों को इन संस्थानों से जुड़कर पारस्परिक हित की परियोजनाओं पर कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। अधिकतम 15 फैलोशिप (80,000 रुपये प्रति माह + आकस्मिक भत्ता) और 25 छात्रवृत्तियां (50,000 रुपये प्रति माह + आकस्मिक भत्ता) अधिकतम 2 वर्षों की अवधि के लिए प्रदान की जाएंगी। फैलोशिप चार समान किस्तों में, छह-छह माह की अवधि के लिए जारी की जाती है।

अनुभवी कलाकारों के लिए वित्तीय सहायता

इस योजना का उद्देश्य 60 वर्ष से अधिक आयु के उन वृद्ध कलाकारों और विद्वानों को अधिकतम 6,000 रुपये प्रति माह की वित्तीय सहायता प्रदान करना है जिनकी वार्षिक आय 72,000 रुपये से अधिक नहीं है और जिन्होंने कला, साहित्य आदि के अपने विशिष्ट क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। लाभार्थी की मृत्यु होने पर, वित्तीय सहायता उनके जीवनसाथी को हस्तांतरित कर दी जाती है।

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(फोटो साभार-सोशल मीडिया)

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