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Green and Sustainable Development Partnership: भारत नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में ग्लोबल लीडर बनकर उभरा

Ministry of New and Renewable Energy ने शनिवार को यहां 'हरित और टिकाऊ विकास साझेदारी (GSDP) संवाद के 10वें संस्करण के अन्तर्गत "नवीकरणीय ऊर्जा के ज़रिए से ऊर्जा सुरक्षा" पर एक पैनल चर्चा का आयोजन किया...

Consumer Khabar: Ministry of New and Renewable Energy ने शनिवार को यहां ‘हरित और टिकाऊ विकास साझेदारी (GSDP) संवाद के 10वें संस्करण के अन्तर्गत “नवीकरणीय ऊर्जा के ज़रिए से ऊर्जा सुरक्षा” पर एक पैनल चर्चा का आयोजन किया।

इस चर्चा में नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRI) के Secretary Santosh Kumar Sarangi, भारत और भूटान में जर्मनी के राजदूत डॉ. फिलिप एकरमैन, री-न्यू की सह-संस्थापक और सस्टेनेबिलिटी की अध्यक्ष वैशाली निगम सिन्हा और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन में जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा मामलों की फेलो और प्रमुख अपर्णा रॉय शामिल हुईं। चर्चा का संचालन क्लाइमेट ट्रेंड्स की एनर्जी प्रमुख श्रेया जय ने किया।

घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने के लिए लक्षित उपाय

एमएनआरई के सचिव ने पिछले दशक में भारत की उल्लेखनीय नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा का उल्लेख किया। इसने देश को वैश्विक प्रमुखों में से एक के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने इस प्रगति का श्रेय एक मजबूत और अनुकूल नीतिगत ढांचे को दिया। इसमें नवीकरणीय खरीद दायित्व/नवीकरणीय खपत दायित्व, ग्रिड-कनेक्टेड सौर, पवन, पवन-सौर हाइब्रिड और पक्की और ज़रूरत के समय उपलब्ध होने वाली नवीकरणीय ऊर्जा से बिजली की खरीद के लिए टैरिफ-आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के लिए मानक बोली दिशानिर्देश, स्वचालित मार्ग के अंतर्गत 100 प्रतिशत तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना तथा स्वीकृत मॉडल और निर्माताओं की सूची जैसी पहलों के माध्यम से घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने के लिए लक्षित उपाय शामिल हैं।

साफ़-सुथरी ऊर्जा के इस्तेमाल के लिए नए रास्ते खुलने की उम्मीद

उन्होंने कहा कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और पीएम-कुसुम जैसी प्रमुख योजनाओं ने राज्यों, परिवारों और किसानों को भारत के नवीकरणीय ऊर्जा परिवर्तन में सबसे आगे ला दिया है।। वहीं, ‘एग्री-पीवी’ और ‘फ्लोटिंग सोलर’ जैसी आने वाली पहल से साफ़-सुथरी ऊर्जा के इस्तेमाल के लिए नए रास्ते खुलने की उम्मीद है। राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के रणनीतिक महत्व पर उन्होंने बताया कि इसमें आयातित जीवाश्म ईंधन पर भारत की निर्भरता कम करने के साथ साथ औद्योगिक डीकार्बोनाइज़ेशन और ऊर्जा सुरक्षा के लिए नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि एक मज़बूत, सुरक्षित और भविष्य के लिए तैयार नवीकरणीय ऊर्जा इकोसिस्टम बनाने के लिए ग्रिड का आधुनिकीकरण, सटीक पूर्वानुमान और शेड्यूलिंग, साफ़-सुथरी ऊर्जा तकनीकों के लिए सर्कुलर इकोनॉमी के तरीके और जलवायु वित्त को बेहतर ढंग से जुटाना बहुत ज़रूरी होगा।

‘उत्पादन आधारित प्रोत्साहन’ योजना जैसी पहलों के महत्व पर दिया बल

एम एन आर ई  के सचिव ने बताया कि सरकार की नीति से जुड़ी पहल को बहुत सोच-समझकर तैयार किया गया है ताकि देश की नवीकरणीय ऊर्जा की विकास यात्रा ज़्यादा से ज़्यादा बाज़ार-आधारित बन सके। सचिव ने ‘उत्पादन आधारित प्रोत्साहन’ (Production-Linked Incentive) योजना जैसी पहलों के महत्व पर भी बल दिया। यह घरेलू निर्माण क्षमता को बढ़ावा दे रही हैं और आत्मनिर्भरता बढ़ा रही हैं और एक मज़बूत नवीकरणीय ऊर्जा इकोसिस्टम के विकास में मदद कर रही हैं। राजदूत डॉ. फिलिप एकरमैन ने कहा कि भारत और जर्मनी आज के जटिल भू-राजनीतिक माहौल में ऊर्जा सुरक्षा हासिल करने की एक अहम और साझा इच्छा रखते हैं। उन्होंने कहा कि मज़बूत द्विपक्षीय साझेदारी से ही सही मायने में आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है। उन्होंने कहा कि भारत का विशाल आकार और गतिशील निजी क्षेत्र रिश्तों को और गहरा करने के बड़े अवसर प्रदान करते हैं। इसके अलावा राजदूत ने इस बात पर भी चर्चा की कि कैसे भारत की ऊर्जा बदलाव की यात्रा अन्य देशों के लिए मूल्यवान सबक दे सकती है और स्थिरता की ओर बढ़ने वाले देशों के लिए वैश्विक स्तर पर अपनाए जाने वाले बेहतरीन तरीकों का एक मॉडल बन सकती है।

इस चर्चा में देश के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के विकास के अगले पड़ावों, उद्योग के लिए भविष्य के अवसरों और ऊर्जा बदलाव व ऊर्जा सुरक्षा की ज़रूरतों के बीच संतुलन बनाने के तरीकों पर भी बात की गई।

इस कार्यक्रम ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए एक अहम मंच के तौर पर ‘भारत-जर्मनी हरित और सतत विकास साझेदारी’ के महत्व को फिर से रेखांकित किया।

Panel Discussion में नीति निर्माताओं ने लिया हिस्सा

भारत भरोसेमंद और सस्ती ऊर्जा तक पहुंच सुनिश्चित करते हुए नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल को तेज़ी से बढ़ा रहा है। इसी क्रम मे इस पैनल चर्चा में नीति-निर्माताओं, अंतरराष्ट्रीय साझेदारों, इंडस्ट्री के प्रमुखों और थिंक टैंक ने हिस्सा लिया। इस चर्चा का उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा की उन संभावनाओं पर विचार करना था जो ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत कर सकें, ऊर्जा के क्षेत्र में संतुलित और समग्र बदलाव ला सकें, और देश की लंबी अवधि की आर्थिक वृद्धि और विकास की आकांक्षाओं को गति दे सकें।

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